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Home Badi Khabar Parliament Security Breach: जानिए कैसे बनता है संसद की दर्शक दीर्घा तक पहुंचने के लिए पास ?

Parliament Security Breach: जानिए कैसे बनता है संसद की दर्शक दीर्घा तक पहुंचने के लिए पास ?

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Parliament Security Breach: जानिए कैसे बनता है संसद की दर्शक दीर्घा तक पहुंचने के लिए पास ?

लोकसभा की कार्यवाही के दौरान आज दो व्यक्ति दर्शक दीर्घा से सदन के अंदर कूद गए, जिससे वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया और संसद की सुरक्षा पर सवाल खड़े गए हैं. लोकसभा में कूदने वाले व्यक्ति का नाम सागर शर्मा और मनोरंजन है. हिरासत में लिए जाने के बाद जब इनका पास चेक किया गया, तो पता चला कि वे मैसूर के रहने वाले हैं और वहां के सांसद की अनुशंसा पर उन्हें दर्शक दीर्घा का पास जारी किया गया था. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर संसद की सुरक्षा में सेंध लगाने वाले इन आरोपियों को दर्शक दीर्घा का पास कैसे मिला और अगर मिला भी तो सुरक्षा में ऐसी क्या कमी रह गई कि इन दोनों आरोपियों ने लोकसभा में घुसकर हंगामा मचा दिया. आइए जानते हैं कि आखिर संसद की दर्शक दीर्घा में प्रवेश के लिए पास कैसे जारी होता है?

1. संसद की कार्यवाही देखने का इच्छुक कोई भी व्यक्ति दर्शक-दीर्घा के पास के लिए आवेदन कर सकता है.

2. इसके लिए उसे अपने क्षेत्र के सांसद से संपर्क करना होता है और अपना आवेदन उन्हें देना होता है.

3. इसके बाद सांसद अगर जरूरी समझते हैं तो उसके आवेदन अनुशंसित करके संसद के सचिवालय भेजते हैं. सांसद अपने लेटर हेड पर यह अनुशंसा भेजते हैं.

4. संसद के सचिवालय में आवेदन करने वाले व्यक्ति की जांच की जाती है. यहां उससे उसका आधार लिया जाता है और उनकी पूरी जांच जमा की जाती है.

5. सचिवालय में वेरिफिकेशन प्रक्रिया के दौरान उसकी तस्वीर भी खिंची जाती है. उसके बाद उस व्यक्ति के लिए पास इश्यू किया जाता है.

6. पास एक निश्वित अवधि के लिए ही दिया जाता है यानी कि आज के पास से कोई व्यक्ति कल जाकर सदन की कार्यवाही नहीं देख सकता है.

संसद और राज्यों के विधानसभा की कार्यवाही देखने के लिए पास बनवाने की प्रक्रिया एक समान है और सांसद और विधायक की अनुशंसा पर ही पास बनाया जाता है. आज लोकसभा की दर्शक दीर्घा से जो शख्स सदन में कूदा है, वह मैसूर के सांसद प्रताप सिम्हा की अनुशंसा पर सदन पहुंचा था.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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