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Parliament Attack : 5 आतंकवादी और 42 मिनट तक संसद परिसर में तांडव

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Parliament Attack : 5 आतंकवादी और 42 मिनट तक संसद परिसर में तांडव
संसद भवन पर हमला

Parliament Attack: 13 दिसंबर 2001 को भारतीय लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर संसद भवन पर आतंकी हमला किया गया था. वो 13 दिसंबर का दिन था जब एक सफेद एंबेसडर कार में आए पांच आतंकवादियों ने 42 मिनट तक संसद भवन परिसर में तांडव मचाया था. पूरा परिसर गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा था.

सुबह 11 बजकर 28 मिनट बजे थे घड़ी में, संसद के शीतकालीन सत्र की सरगर्मियां तेज थीं. विपक्ष के जबरदस्त हंगामे के बाद दोनों सदनों की कार्यवाही 40 मिनट के लिए स्थगित की गई थी. सदन स्थगित होते ही प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और विपक्ष की नेता सोनिया गांधी सदन से निकल चुके थो. वे अपने-अपने सरकारी निवास के लिए रवाना हो गए थे. गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी अपने कई साथी मंत्रियों और लगभग 200 सांसदों के साथ अब भी लोकसभा में ही थे. लोकसभा परिसर के अंदर मीडिया का पूरा जमावड़ा नजर आ रहा था.

सुबह के 11 बजकर 30 मिनट पर, अचानक सफेद रंग की एंबेसेडर कार संसद भवन में इंट्री करती है. गाड़ी में मंत्रालय का स्टीकर चिपका था. संसद भवन में प्रवेश के लिए जो तय रफ्तार थी, उससे उस गाड़ी की रफ्तार अधिक थी. सुरक्षाकर्मी जगदीश यादव गाड़ी को रोकने के लिए उसके पीछे भागे. यादव को गाड़ी के पीछे भागते देख उपराष्ट्रपति कृष्णकांत शर्मा के सुरक्षाकर्मी एएसआई जीत राम, एएसआई नानक चंद और एएसआई श्याम सिंह अपना पोजिशन में आ जाते हैं. सुरक्षाकर्मी को अपनी ओर आते देख गाड़ी का ड्राइवर गेट नंबर एक ही ओर स्टीयरिंग घुमा देता है. इस बीच नियंत्रण खोने की वजह से गाड़ी उपराष्ट्रपति की कार से टकराती है.

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इसके बाद एंबेसेडर से पांच आतंकवादी उतरते हैं और गोलियों की बौछार करने लगते हैं. सभी के हाथ में एके-47 थे. उनकी पीठ पर गोले और बारूद थे. संसद भवन में प्रवेश कर चुके पांचों आतंकवादियों ने सबसे पहले अपना निशाना गाड़ी का पीछा कर रहे सुरक्षाकर्मियों को बनाया. पलभर में ही स्थिति साफ हो चुकी थी कि देश के सबसे बड़े लोकतंत्र के मंदिर पर आतंकी घुस चुके हैं.

सुरक्षाकर्मियों ने पांचों आतंकवादियों को ढेर कर दिया था. इस पूरी कार्रवाई में 9 जवान शहीद हो गए जबकि 16 जवान घायल हुए थे. शहीद होने वाले जवानों में जगदीश प्रसाद यादव, मातबर सिंह नेगी, नानक चंद, रामपाल, ओमप्रकाश, बिजेन्द्र सिंह, घनश्याम, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की एक महिला कांस्टेबल कमलेश कुमारी और सीपीडब्ल्यूडी के एक कर्मचारी देशराज शामिल थे.

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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