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Home National भोजशाला मामले पर कोर्ट के फैसले से ‘खफा’ ओवैसी, बाबरी का जिक्र करते हुए कही ये बात

भोजशाला मामले पर कोर्ट के फैसले से ‘खफा’ ओवैसी, बाबरी का जिक्र करते हुए कही ये बात

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भोजशाला मामले पर कोर्ट के फैसले से ‘खफा’ ओवैसी, बाबरी का जिक्र करते हुए कही ये बात
एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी. फोटो- एक्स (@RajaOwaish).

Bhojshala Temple: शुक्रवार को मध्य प्रदेश के धार जिले स्थित भोजशाला परिसर को लेकर इंदौर हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया. 24 दिन तक चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने 15 मई के अपने फैसले में इस परिसर को हिंदू मंदिर माना. हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस आदेश की कड़ी आलोचना की और दावा किया कि यह फैसला भारत के संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है. शुक्रवार को हैदराबाद में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ओवैसी ने कहा कि यह फैसला बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद के कानूनी रास्ते की ही तरह प्रतीत होता है.

उन्होंने कहा, ‘यह फैसला संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है. बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद में दिए गए फैसले में एक धर्म को प्राथमिकता दी गई, जबकि दूसरे समुदाय के पूजा के अधिकारों को प्रभावी रूप से कमजोर किया गया. इसके अलावा, इस फैसले ने कई नए विवादों के लिए रास्ता खोल दिया है. कल कोई भी व्यक्ति किसी भी धार्मिक स्थल की पवित्रता को चुनौती देने के लिए सामने आ सकता है.’

ओवैसी ने न्यायपालिका के रुख में विरोधाभास का आरोप लगाते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले बाबरी मस्जिद मामले में प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट को संविधान की ‘बेसिक स्ट्रक्चर’ से जोड़ा था, लेकिन अब उसी सिद्धांत को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है. प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट का मजाक बना दिया गया है.’

बाबरी मस्जिद केस जैसा साबित हुआ यह फैसला- ओवैसी

बाबरी मस्जिद मामले से सीधी तुलना करते हुए ओवैसी ने कहा, ‘यह फैसला बिल्कुल बाबरी मस्जिद मामले जैसा साबित हुआ है. बाबरी मस्जिद केस में अदालत ने कहा था कि मुसलमानों का उस स्थल पर कब्जा नहीं था. लेकिन इस मामले में आज तक मेरे पास कब्जा था.’

उन्होंने आगे कहा, ‘मैंने पहले भी कहा था कि बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद पर दिया गया फैसला गलत था और केवल आस्था के आधार पर दिया गया था. मैंने चेतावनी दी थी कि उस समय दिया गया फैसला आगे चलकर ऐसे कई विवादों का रास्ता खोलेगा. उस समय बहुत से लोगों ने मुझसे कहा था कि चुप रहो. आज देखिए क्या हो रहा है. जिस फैसले को मैंने उदाहरण के तौर पर पेश करते हुए कहा था कि इससे ऐसे कई घटनाक्रम सामने आएंगे, अब वही हो रहा है और वही राहत दी जा रही है.’

वीडियो में देखें असदुद्दीन ओवैसी का पूरा बयान.

महली बोले- अयोध्या मामले से अलग भोजशाला फैसला

इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के चेयरमैन और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कार्यकारी सदस्य मौलाना खालिद राशिद फिरंगी महली ने कहा कि हाई कोर्ट के फैसले से मुस्लिम समुदाय में निराशा जरूर है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट अभी भी कानूनी लड़ाई के लिए खुला मंच है. उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले को बाबरी मस्जिद केस से अलग तरीके से देखा जाना चाहिए.

उन्होंने कहा, ‘भोजशाला मामले में हाई कोर्ट के फैसले से मुसलमानों में गहरी निराशा हुई है, क्योंकि आज ही नहीं बल्कि सदियों से वहां स्थित मस्जिद में मुसलमान नमाज अदा करते आ रहे हैं. हालांकि, यह हाई कोर्ट का फैसला है और मुसलमानों के लिए सुप्रीम कोर्ट का रास्ता अभी खुला है.’

उन्होंने कहा, ‘अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इस मामले में संदर्भ जरूर लिया गया है. लेकिन अयोध्या मामला पूरी तरह अलग था और वर्तमान मामला भी अलग है. इसलिए हम दोनों मामलों के बीच कोई संबंध नहीं देखते. जहां तक कानूनी पहलुओं का सवाल है और मुस्लिम समुदाय के पास जो ऐतिहासिक दस्तावेज एवं सबूत हैं, उनके आधार पर हमें विश्वास है कि इंशाअल्लाह सुप्रीम कोर्ट में हमें सफलता मिलेगी.’

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कोर्ट ने हिंदू पक्ष को दिया पूजा का अधिकार

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने फैसला सुनाते हुए हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार दिया और परिसर को राजा भोज से संबंधित माना. हिंदू पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे वकील विष्णु शंकर जैन ने इस फैसले को ‘ऐतिहासिक’ बताया और कहा कि अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के 7 अप्रैल 2003 के आदेश को आंशिक रूप से निरस्त कर दिया है. जैन ने कहा कि अदालत ने हमें पूजा-अर्चना का अधिकार दिया है और सरकार को स्थल के प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी है. ASI का वह पुराना आदेश, जिसमें नमाज की अनुमति दी गई थी, पूरी तरह निरस्त कर दिया गया है. अब वहां केवल हिंदू पूजा ही होगी.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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