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नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की नहीं, व्यवस्था की आत्मा मर गई

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नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की नहीं, व्यवस्था की आत्मा मर गई
सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज को ढूंढती एनडीआरएफ की टीम, इनसाइट में युवराज का फाइल फोटो, PHOTO पीटीआई

Noida Techie Death Case: 27 साल के युवराज मेहता की मौत ने झकझोर कर रख दिया है. उनकी मौत के बाद जांच की जा रही है. दोषियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो चुकी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पांच दिनों के अंदर जांच रिपोर्ट मांगी है. लेकिन सवाल है, युवराज की मौत के लिए जिम्मेदार कौन है? जब युवराज मर रहा था, उस समय घटनास्थल पर पुलिस, फायर ब्रिगेड, SDRF और NDRF की टीमें भी मौजूद थीं. लेकिन कोई कुछ न कर सका. सभी बचाव के साधन मौजूद रहने के बाद भी युवराज को पानी में समा जाने दिया गया.

युवराज को बचाने के लिए लगा दी जान की बाजी

सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत मामले में चश्मदीद ने जो बताया उससे सिस्टम की पूरी पोल खुल गई. एक ऑनलाइन मार्केटिंग कंपनी में डिलीवरी बॉय मोनिंदर ने युवराज को बचाने के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी. उसने बताया, रात करीब 12 बजे गाड़ी गड्ढे में गिरी. गाड़ी गिरने के बाद पानी में लड़के ने करीब डेढ़ से दो घंटे तक खुद को बचाने की गुहार लगाई. मौके पर पुलिस, SDRF, फायर ब्रिगेड की टीमें मौजूद थीं. किसी ने उसकी मदद नहीं की. बोल रहे थे, ठंडा पानी है…पानी में सरिया है…हम नहीं जाएंगे. इस मौत के लिए जिम्मेदार सरकारी महकमा है. मैं वहां रात करीब 1:45 बजे पहुंचा. मैंने देखा सभी किनारे पर खड़े थे, लेकिन कोई पानी में जाने के लिए तैयार नहीं था. मेरे वहां पहुंचने से 10 मिनट पहले ही लड़का डूबा था. मैंने बचाव दल से कहा, तुम बाहर आओ, मैं पानी में जाऊंगा. मैंने कमर में रस्सी बांधी और पानी में करीब 50 मीटर तक अंदर गया. 30 मिनट तक उस लड़के को मैंने पानी के अंदर ढूंढा, लेकिन न तो लड़का मिला और न उसकी गाड़ी मिली.

युवराज की मौत ने खोल दी सिस्टम की पोल

चश्मदीद ने जो बताया, उससे साफ जाहिर होता है कि अगर रेस्क्यू टीम चाहती तो युवराज आज जिंदा होता. बचाव दल आपदा या हादसे के समय कई तरह के आधुनिक और विशेष उपकरणों से लैस होती हैं. जिससे हर परिस्थिति में जान बचाई जा सके.

पानी में डूबने की स्थिति में बचाव के लिए टीम के पास क्या-क्या उपकरण होते हैं

रेस्क्यू बोट
लाइफ जैकेट और लाइफ रिंग
रोप रेस्क्यू किट (मजबूत रस्सियां, हार्नेस, करैबिनर)
अंडरवॉटर सर्च कैमरा
स्कूबा डाइविंग किट (ऑक्सीजन सिलेंडर, मास्क, फिन्स)
फायर टेंडर और वाटर कैनन
फायर एक्सटिंग्विशर (CO₂, फोम, ड्राई केमिकल)
थर्मल सूट और फायर प्रूफ गियर
स्मोक एक्सट्रैक्टर और वेंटिलेशन फैन
हेलमेट, सेफ्टी ग्लव्स
बुलेटप्रूफ / कट-रेसिस्टेंट जैकेट
गैस मास्क और रेस्पिरेटर

पिता की आंखों के सामने पानी में समा गया युवराज

जब युवराज मेहता पानी में डूब रहे थे, तब बाहर उनके पिता राजकुमार मेहता उन्हें बचाने की गुहार लगाते रहे. पुलिस और फायर की टीम मौके पर थी, लेकिन कोई बचाव के लिए आगे नहीं आया. बेटा पानी में डूब रहा था और बाहर पिता सिस्टम को कोसते रहे. राजकुमार ने मीडिया से बातचीत में बताया- उनका बेटा कह रहा था पापा बचाओ, पापा बचाओ…वहां मौजूद भीड़ तमाशबीन थी. कुछ लोग वीडियो बना रहे थे.

पहले जान गई, फिर सिस्टम जागा

जिस डेथ प्वाइंट पर युवराज की गाड़ी अनियंत्रित हुई और जिस निर्माणाधीन इमारत के बेसमेंट के लिए खोदे गए पानी से भरे गड्ढे में उसकी मौत हुई. वहां 15 दिन पहले भी एक ट्रक गिर गया था. उस समय भी मोनिंदर ने ही ट्रक ड्राइवर की जान बचाई थी. स्थानीय लोगों ने उस खतरनाक जगह को लेकर पहले भी कई बार शिकायत की. लेकिन नोएडा अथॉरिटी ने आंखें मूंदे रखीं. हालांकि युवराज की मौत के बाद ही वहां मलबा डालकर रास्ता बंद किया गया. यानी – पहले जान गई, फिर सिस्टम जागा.

सीएम योगी से मिलना चाहते हैं युवराज के पिता

मृतक के पिता राजकुमार मेहता ने कहा, “सरकार द्वारा की गई तेजी से कार्रवाई और SIT टीम के गठन से मुझे राहत मिली है. मुझे विश्वास है कि मेरे बेटे की आत्मा को न्याय मिलेगा. ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए घटना वाली जगह पर उचित सुरक्षा उपाय भी किए गए हैं. सभी संभव उपाय किए जा रहे हैं. हम एक बार CM योगी से मिलना चाहेंगे. इससे हमें मन की शांति मिलेगी. सरकार की तरफ से हमें आश्वासन दिया गया है कि हमें सही दिशा में सही सहयोग मिलेगा.

राहुल गांधी ने भी सिस्टम पर उठाया सवाल

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने युवराज की मौत के बाद सिस्टम पर सवाल उठाया. उन्होंने युवराज के पिता और चश्मदीद का वीडियो एक्स पर शेयर किया और लिखा- सड़कें जान ले रही हैं, पुल जान ले रहे हैं, आग जान ले रही है, प्रदूषण जान ले रहा है, भ्रष्टाचार मार रहा है, उदासीनता मार रही है. भारत का शहरी स्तर पर पतन का कारण धन, प्रौद्योगिकी या समाधान की कमी नहीं है, बल्कि यह जवाबदेही के अभाव के कारण है. उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, टीना : देयर इस नो अकाउंटेबिलिटी (कोई जवाबदेही नहीं है).

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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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