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Home National नीट यूजी परीक्षा : 22 जून तक बैन किए जाने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ टेलीग्राम ने खटखटाया दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा

नीट यूजी परीक्षा : 22 जून तक बैन किए जाने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ टेलीग्राम ने खटखटाया दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा

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नीट यूजी परीक्षा : 22 जून तक बैन किए जाने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ टेलीग्राम ने खटखटाया दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा
दिल्ली हाईकोर्ट

Telegram : टेलीग्राम ने नीट यूजी एग्जाम से पहले कंपनी को बैन करने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है. यह मामला जस्टिस ताजस करिया की बेंच के सामने पेश किया गया, वे आज 17 जून को इस पर सुनवाई के लिए मान गए हैं. केंद्र सरकार ने 16 जून को यह फैसला किया था कि 21 जून को आयोजित होने वाली नीट यूजी की परीक्षा के मद्देनजर 22 जून तक टेलीग्राम को बंद करने का फैसला किया है.

21 जून को दोबारा हो रही है परीक्षा

नीट यूजी की परीक्षा 3 मई को आयोजित की गई थी,लेकिन पेपर लीक की आशंका के बीच 12 मई को परीक्षा स्थगित कर दी गई. परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी एनटीए ने परीक्षा को स्थगित कर इसे 21 जून जो दोबारा आयोजित किया है. इसी परीक्षा को शांति पूर्ण तरीके से करवाने के लिए एनटीए की सिफारिशों के बाद सरकार ने भारत में टेलीग्राम का एक्सेस रोक दिया है. यह प्रतिबंध अस्थायी है और 22 जून को बाद यह प्रतिबंध हटा लिया जाएगा.

प्रतिबंध के लिए रिलायंस, व्हाट्सएप को ठहराया जिम्मेदार

टेलीग्राम के सीईओ पावेल ड्यूरोव ने आरोप लगाया कि रिलायंस समूह ने व्हाट्सएप के साथ मिलकर भारत में एप पर प्रतिबंध के लिए शायद पैरवी की है. उन्होंने एक्स पर पोस्ट लिखा कि मेटा प्लेटफॉर्म्स की रिलायंस में आंशिक हिस्सेदारी है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रिलायंस ने भारत के बाहर लाखों उपयोगकर्ताओं के लिए टेलीग्राम की पहुंच में बाधा डाली है.दूरसंचार क्षेत्र के एक वरिष्ठ सूत्र ने नाम न बताने की शर्त पर इन आरोपों को फर्जी खबर करार दिया और कहा कि ड्यूरोव ने रिलायंस कम्युनिकेशंस तथा रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के बीच भ्रम पैदा कर दिया है.

ये भी पढ़ें : NEET री-एग्जाम से पहले मोदी सरकार का बड़ा एक्शन, 22 जून तक Telegram बैन

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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