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Namami Ganga: इको-सिस्टम का विकास कर गंगा जीर्णोद्धार के योजनाओं को मिली मंजूरी

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Namami Ganga: इको-सिस्टम का विकास कर गंगा जीर्णोद्धार के योजनाओं को मिली मंजूरी
ganga river

Namami Ganga:नदी और पर्यावरण पुनरुद्धार को लेकर केंद्र सरकार लगातार काम कर रही है. राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) की 62वीं कार्यकारी समिति (ईसी) की बैठक में नदी के पुनरुद्धार करने की योजना पर मंथन किया गया. बैठक में महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि के संरक्षण और शहर-विशिष्ट पुन: उपयोग योजनाओं के माध्यम से उपचारित अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग को बढ़ावा देने पर विचार-विमर्श किया गया. समिति ने उन परियोजनाओं को मंजूरी दी जो गंगा बेसिन में इको-सिस्टम की बहाली के मिशन के उद्देश्यों के अनुरूप हैं.

बैठक में बिहार के भोजपुर में नथमलपुर भगड़ (वेटलैंड) के संरक्षण और सतत प्रबंधन” परियोजना को मंजूरी दी गयी और इस योजना पर 3.51 करोड़ रुपये खर्च होने को अनुमान है. यह परियोजना एनजीपी के तहत शुरू की जा रही पांचवीं वेटलैंड है और इसके तहत नथमलपुर भगड़ के लिए एक प्रभावी प्रबंधन व्यवस्था स्थापित करना है. अब तक नमामि गंगे के तहत 4 वेटलैंड के संरक्षण को मंजूरी दी जा चुकी है. वेटलैंड संरक्षण के तहत उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर स्थित कालेवाड़ा झील, प्रयागराज स्थित नामिया दाह झील, रेवती दाह वेटलैंड, बलिया, उत्तर प्रदेश और उधवा झील (रामसर साइट) साहिबगंज, झारखंड को मंजूरी दी गयी है.

जैव विविधता को मिलेगा संरक्षण

नदी बेसिन संरक्षण और विकासात्मक योजना के तहत जैव विविधता और इको-सिस्टम को एकीकृत करने पर जोर दिया गया है. परियोजना उप-बेसिन (घाघरा, गोमती और सोन संगम) और साइट स्तरों (नथमलपुर भगद) में आर्द्रभूमि परिसीमन, जल विज्ञान व्यवस्था में वृद्धि, प्रजाति और आवास संरक्षण, पारिस्थितिकी मूल्यांकन, जोखिम मूल्यांकन, क्षमता निर्माण, संचार और आउटरीच और आर्द्रभूमि इको-सिस्टम के दीर्घकालिक स्वास्थ्य और स्थिरता को सुनिश्चित करने के लिए निगरानी तंत्र जैसी गतिविधियां को मजबूत करने की बात कही गयी है. 

ईसी ने उत्तर प्रदेश के आगरा और प्रयागराज जिलों के लिए शहरी योजनाओं की तैयारी और उपचारित अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग पर प्रशिक्षण के लिए गंगा बेसिन में जल-संवेदनशील शहर बनाने के लिए क्षमता निर्माण पहल परियोजना के लिए 34.50 लाख रुपये के वित्तपोषण को भी मंजूरी दी. इस परियोजना का मकसद एनएमसीजी द्वारा विकसित उपचारित जल के सुरक्षित पुनः उपयोग के लिए राष्ट्रीय ढांचे (एसआरटीडब्ल्यू) के अनुरूप शहरी स्तर पर पुनः उपयोगी योजना का निर्माण करना है. विद्युत मंत्रालय के संयुक्त सचिव और वित्तीय सलाहकार (अतिरिक्त प्रभार) नदी विकास और गंगा संरक्षण, जल शक्ति मंत्रालय महावीर प्रसाद, एनएमसीजी के उप महानिदेशक नलिन श्रीवास्तव, कार्यकारी निदेशक (तकनीकी) अनूप कुमार श्रीवास्तव, कार्यकारी निदेशक (परियोजनाएं) बृजेन्द्र स्वरूप, कार्यकारी निदेशक (प्रशासन) एसपी वशिष्ठ, कार्यकारी निदेशक (वित्त) भास्कर दासगुप्ता, उत्तर प्रदेश एसएमसीजी के अतिरिक्त परियोजना निदेशक प्रभास कुमार और बिहार के मुख्य वन संरक्षक-सह- राज्य नोडल अधिकारी, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन एस चंद्रशेखर बैठक में मौजूद रहे.

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