[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home Badi Khabar Mob Lynching: देश में पहली बार कब हुई थी मॉब लिंचिंग, इस सख्श की हुई थी बेरहमी से हत्या

Mob Lynching: देश में पहली बार कब हुई थी मॉब लिंचिंग, इस सख्श की हुई थी बेरहमी से हत्या

0
Mob Lynching: देश में पहली बार कब हुई थी मॉब लिंचिंग, इस सख्श की हुई थी बेरहमी से हत्या

Mob Lynching: महाराष्ट्र के पालघर में दो साधु और उनके एक ड्राइवर की बेरहमी से हत्या के बाद आम लोगों का वही उग्र चेहरा पश्चिम बंगाल में नजर आया, जिससे एक बार फिर मॉब लिंचिंग की याद ताजा हो गई. जगह बदल गया और लोग भी बदल गये लेकिन घटना वही रही… मॉब लिंचिंग… चंद ऐसे उग्र लोगों के समूह ने कुछ साधुओं को न सिर्फ लाठी डंडे से मारा बल्कि उन्हें निर्वस्त्र कर दिया. सोशल मीडिया पर एक छोटा सा क्लिप खूब वायरल हो रहा है. जिसमे दिखाया गया है कि कैसे भीड़ में शामिल लोग कुछ साधुओं के समूह को मार पीट रहे हैं. घटना पश्चिम बंगाल के पुरुलिया का है. जहां साधुओं के एक ग्रुप को कथित तौर पर भीड़ ने जमकर मारा-पीटा.

पुरुलिया में साधुओं को लोगों ने मारा-पीटा
साधुओं का एक समूह उत्तर प्रदेश से पश्चिम बंगाल के मशहूर तीर्थ गंगासागर जा रहा था. इस दौरार पुरुलिया में लोगों ने उनकी जमकर पिटाई कर दी. घटना को लेकर पुरुलिया के एसपी अभिजीत बनर्जी ने कहा कि तीन साधु एक वाहन में जा रहे थे. गोराडीह के पास साधुओं काली मंदिर के रास्ते जा रही कुछ लड़कियों से कुछ पूछा. भाषाई भिन्नता के कारण लड़कियों को कुछ गलतफहमियां हुईं और लड़कियों को लगा कि साधु उनका पीछा कर रहे हैं. इसके बाद वहीं स्थानीय लोग जमा हो गये और साधुओं के साथ भी मारपीट शुरू कर दी. घटना के बाद इस मामले में 12 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

पहले भी हो चुकी है मॉब लिंचिंग की घटना
मॉब लिंचिंग की यह कोई पहली घटना नहीं है. देश के कई राज्य कई बार ऐसी अमानवीय घटना की गवाही दे चुके हैं. मॉब लिंचिंग के कारण कई लोगों की जान जा चुकी है, कई घर तबाह हो चुके हैं. लेकिन इसके बाद भी इस घटना पर लगाम नहीं लग पाया है. आज भी देखते ही देखते लोग अपना आपा खो देते हैं. महाराष्ट्र के पालघर में भी कोरोना काल में मॉब लिंचिंग की घटना सामने आयी था, जिसमें दो साधुओं के साथ उनके ड्राइवर को भीड़ ने मार डाला था.

साल 2023 के जनवरी महीने में बिहार के गया स्थित किशनपुर गांव में घर में घुसे दो चोरों को ग्रामीणों ने लोगों दबोच लिया और उनकी बेरहमी से पिटाई कर दी. लोगों ने दोनों को इतना मारा की एक शख्स की मौत हो गई और दूसरे अधमरी हालत में अस्पताल पहुंचाना पड़ा.
वहीं, भागलपुर में प्रेम प्रसंग के एक मामले में सनोखर थाना क्षेत्र मे ग्रामीणों ने एक युवक को पकड़ लिया और उसे मौत के घाट उतार दिया. झारखंड के दुमका के कपरजोरा गांव में भी भीड़ ने चोरी के आरोप में  एक शख्स को पेड़ से बांधकर पीट-पीटकर मार डाला था. इससे पहले राजस्थान में मीट शॉप चलाने वाले 60 साल के एक बुजुर्ग को भीड़ ने सरिये से मारकर हत्या कर दी थी. यूपी में भैंसों को ले जा रहे 3 लोगों को भीड़ ने पीट पीटकर मार डाला था.

पहली बार कब सामने आया था मॉब लिंचिंग का मामला
भारत में पहली बार दर्ज मॉब लिंचिंग का मामला साल 1830 में पुणे शहर में दर्ज हुई थी. इस घटना में महात्मा फुले के पिता गोविंदराव फुले की हत्या हो गई थी. रिपोर्ट के अनुसार उस समय समाज के लोगों ने उनपर उस समय के प्रचलित सामाजिक मानदंडों की अवहेलना करने का आरोप लगाया था. मॉब लिंचिंग दुर्भाग्य से भारत के इतिहास में बार-बार दोहराए जाने वाला मुद्दा बन गया है. आये दिन इसकी बानगी कहीं न कहीं दिख जाती है. हालांकि ऐसी घटनाओं से निपटने और उन्हें रोकने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है. 

Also Read: मालदीव लक्षद्वीप विवादः चीन से लौटते ही मुइज्जू ने तरेरी आंख, भारत के खिलाफ दे दिया बड़ा बयान
Also Read: 22 जनवरी राष्ट्रीय छुट्टी! राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा से पहले सोशल मीडिया पर PM Modi से उठी यह मांग

Previous article साल 2023 का आखरी महीने में टू-व्हीलर की जबरदस्त सेल, दिसंबर में 12 लाख से अधिक गाड़ियां बिकीं
Next article पीएम नरेंद्र मोदी 27 जनवरी को करेंगे चुनावी आगाज, बेतिया-पटना एक्सप्रेसवे समेत कई परियोजनाओं का करेंगे उद्घाटन
Avatar Of Pritish Sahay
प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel