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Home National 30 जून के बाद मनरेगा बंद, 1 जुलाई से लागू होगी वीबी-जी राम जी योजना

30 जून के बाद मनरेगा बंद, 1 जुलाई से लागू होगी वीबी-जी राम जी योजना

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30 जून के बाद मनरेगा बंद, 1 जुलाई से लागू होगी वीबी-जी राम जी योजना
वीबी-जी राम जी योजना 1 जुलाई से पूरे देश में होगा लागू

VB-G Ram G Scheme केंद्र सरकार ने सोमवार (11 जुलाई) को घोषणा की है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह नया विकसित भारत- रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (वीबी-जी राम जी योजना) 1 जुलाई से पूरे देश में लागू किया जाएगा. नई व्यवस्था के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को अब साल में 100 की जगह 125 दिन के वैतनिक रोजगार की गारंटी मिलेगी.

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने बताया ऐतिहासिक बदलाव

ग्रामीण विकास मंत्रालय (Ministry of Rural Development) ने इस बदलाव को भारत की ग्रामीण विकास संरचना में एक ऐतिहासिक परिवर्तन बताया है. मंत्रालय ने कहा कि यह विकसित भारत 2047 की अवधारणा के अनुरूप है. सरकार की अधिसूचना के मुताबिक नया कानून 1 जुलाई से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगा और उसी दिन से मनरेगा खत्म हो जाएगा.

श्रमिकों पर नहीं पड़ेगा असर

सरकार ने साफ कर दिया है कि इस बदलाव से श्रमिकों पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा. 30 जून तक के सभी मनरेगा कार्य सुरक्षित रहेंगे और उन्हें नए ढांचे में बिना रुकावट स्थानांतरित किया जाएगा. ई-केवाईसी सत्यापित जॉब कार्ड तब तक मान्य रहेंगे जब तक नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी नहीं हो जाते.

125 दिन की रोजगार गारंटी

नए मिशन के तहत ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्य, जो अकुशल श्रम के लिए स्वेच्छा से काम करते हैं, उन्हें एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों का रोजगार मिलेगा. यह मनरेगा की 100 दिन की गारंटी से अधिक है. रोजगार समय पर उपलब्ध न कराने की स्थिति में श्रमिकों को बेरोजगारी भत्ता देने का भी प्रावधान किया गया है.

बजट और खर्च

सरकार के अनुसार साल 2026-27 के लिए ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम का बजट 95,692.31 करोड़ रुपये तय किया गया है, जो अब तक का सबसे बड़ा आवंटन है. राज्यों के योगदान को मिलाकर कुल खर्च 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है.

मनरेगा कब हुआ था शुरू?

महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लोयमेंट गारंटी एक्ट (मनरेगा, MGNREGA) की शुरुआत 2006 में आंध्रप्रदेश में हुई, बाद में इसे पूरे देश में लागू किया गया. 1 जुलाई 2026 से इस कानून की जगह विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक 2025 (Viksit Bharat- Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin) Act) लागू किया जा रहा है.

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प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.
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