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Home National मन की बात : पीएम मोदी ने कहा- विश्व की सबसे बड़ी जनगणना अपने देश में शुरू हो चुकी है, इसे सफल बनाएं

मन की बात : पीएम मोदी ने कहा- विश्व की सबसे बड़ी जनगणना अपने देश में शुरू हो चुकी है, इसे सफल बनाएं

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मन की बात : पीएम मोदी ने कहा- विश्व की सबसे बड़ी जनगणना अपने देश में शुरू हो चुकी है, इसे सफल बनाएं
मन की बात में पीएम मोदी

Mann Ki Baat : प्रधानमंत्री ने जनगणना में सबसे सहयोग करने की बात कही. उन्होंने कहा कि 2027 में पूरा होने वाली यह जनगणना विश्व की सबसे बड़ी जनगणना है. इसमें सबको सहयोग करना चाहिए. उन्होंने कहा कि यह हम सबकी जिम्मेदारी है. प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बार, मन की बात की शुरुआत देश की बड़ी कामयाबी से करते हैं. उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा साइंस को देश की तरक्की से जोड़कर देखा है. इसी सोच के साथ, हमारे साइंटिस्ट स्पेस प्रोग्राम को आगे बढ़ा रहे हैं. उनकी कोशिशों की वजह से स्पेस प्रोग्राम काफी उन्नत हो चुका है.

देश का डेयरी उद्योग काफी तरक्की कर रहा है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के डेयरी उद्योग के बारे में बात किया. उन्होंने कहा कि हमारे देश में विभिन्न प्रकार के चीज बनाए जाते हैं. जो सिर्फ गाय और भैंस के दूध से ही नहीं बनते हैं, बल्कि याक, ऊंट और अन्य जानवरों के दूध से भी बनाए जाते हैं. भारत में जो विभिन्न प्रकार के चीज बनाए जाते हैं, उनकी विदेशों में काफी मांग भी है.

गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर को किया याद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के अपने संबोधन में गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर को याद किया और कहा कि हम उनकी जयंती मनाने वाले हैं. वे एक महान विचारक और विभिन्न संस्थाओं को बनाने वाले थे. मई के महीने में 1857 का विद्रोह हुआ था, इसलिए प्रधानमंत्री ने उस स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों को भी याद किया. प्रधानमंत्री ने देश में मनाए गए नववर्ष और त्योहारों का जिक्र भी किया. उन्होंने बच्चों से यह आग्रह किया कि उनकी छुट्टियां शुरू होने वाली है, तो वे इन छुट्टियां का भरपूर इस्तेमाल करें और कुछ नया सीखने का प्रयास भी करें.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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