Lucknow High Court: अयोध्या के राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है.इस मामले में लखनऊ हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका ( Public Interest Litigation) दायर की गई है. याचिकाकर्ता और अधिवक्ता मोती लाल का आरोप है कि मंदिर के चंदे में लगभग 200 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी हुई है. एएनआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, उन्होंने कहा कि विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से चोरी का खुलासा हुआ है.उन्होंने कोर्ट से इस मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है.
न्यायिक आयोग गठन की मांग
याचिकाकर्ता मोती लाल ने अपनी याचिका में मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक न्यायिक आयोग गठित किया जाए.उनका कहना है कि केवल स्वतंत्र न्यायिक जांच ही पूरे मामले की सच्चाई सामने ला सकती है. इसके साथ ही उन्होंने अयोध्या के जिला जज को राम मंदिर ट्रस्ट का रिसीवर नियुक्त करने की भी मांग की है ताकि जांच प्रक्रिया निष्पक्ष ढंग से आगे बढ़ सके.
ट्रस्ट के खाते फ्रीज करने की अपील
याचिका में यह भी मांग गई की है कि विशेष जांच टीम (SIT) की जांच पूरी होने तक ट्रस्ट की शक्तियों और बैंक खातों को अस्थायी रूप से फ्रीज किया जाए.याचिकाकर्ता मोती लाल का आरोप है कि मामले के मुख्य जिम्मेदार पदाधिकारियों को बचाने और छोटे कर्मचारियों को फंसाने की कोशिश की जा रही है, जिससे वास्तविक दोषियों तक जांच नहीं पहुंच पा रही है.
ट्रस्ट के बड़े अधिकारियों को बचाने और छोटे कर्मचारियों को फंसाने की साजिश
याचिकाकर्ता अधिवक्ता मोती लाल ने सरकार पर ट्रस्ट के बड़े कर्मचारियों को बचाने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि SIT जांच के नाम पर योगी सरकार ट्रस्ट के बड़े अधिकारियों को बचाना चाहती है और मंदिर के छोटे कर्मचारियों को फंसाने की साजिश रची जा रही है. अधिवक्ता मोती लाल ने कहा कि यह करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा मामला है और सरकार ऐसे संगीन मामले को लिपा- पोती (दबाने) करने में लगी हुई है. उन्होंने हाई कोर्ट से अपील किया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पर प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई की जाए, ताकि दोषियों को सजा और निर्दोषों को न्याय मिल सके.
