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Home National जस्टिस स्वर्णकांता की कोर्ट में प्रस्तुत नहीं होंगे केजरीवाल, कहा-मुझे वहां न्याय की उम्मीद नहीं; सत्याग्रह के मार्ग पर चलूंगा

जस्टिस स्वर्णकांता की कोर्ट में प्रस्तुत नहीं होंगे केजरीवाल, कहा-मुझे वहां न्याय की उम्मीद नहीं; सत्याग्रह के मार्ग पर चलूंगा

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जस्टिस स्वर्णकांता की कोर्ट में प्रस्तुत नहीं होंगे केजरीवाल, कहा-मुझे वहां न्याय की उम्मीद नहीं; सत्याग्रह के मार्ग पर चलूंगा
अरविंद केजरीवाल

Kejirwal At Rajghat : आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया शराब घोटाला मामले में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से या वकील के माध्यम से पेश न होने के फैसले पर सत्याग्रह का मार्ग अपनाने से पहले महात्मा गांधी को नमन करने राजघाट पहुंचे.उनके साथ आप के कई अन्य नेता भी मौजूद थे.

जस्टिस स्वर्णकांता की कोर्ट में क्यों नहीं पेश होना चाहते हैं केजरीवाल और सिसोदिया

अरविंद केजरीवाल ने एक वीडियो जारी कर यह स्पष्ट किया है कि उनका जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं है, लेकिन वो आरएसएस की विचारधारा का समर्थन करने वाली संस्थाओं के मंच पर कई बार जा चुकी हैं. ऐसे में उनकी अदालत में केजरीवाल को न्याय मिलेगा इसका उन्हें भरोसा नहीं है. साथ ही वे हितों के टकराव की बात भी कर रहे हैं. उनका कहना है कि जस्टिस स्वर्णकांता के बच्चे सरकार के पैनल में सरकारी वकील हैं, उन्हें सरकार सबसे ज्यादा केस देती है. इस स्थिति में जस्टिस स्वर्णकांता की अदालत में उन्हें न्याय मिलेगा इसकी संभावना उन्हें बहुत कम नजर आ रही है.

जस्टिस स्वर्णकांता को केजरीवाल ने पत्र लिखकर किया सूचित

दिल्ली के पूर्ण मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री सिसोदिया ने हाईकोर्ट की जज स्वर्णकांता शर्मा को पत्र लिखकर उन्हें बताया है कि वे शराब घोटाला मामले में उनकी अदालत में अपना पक्ष नहीं रखेंगे. राजघाट पर केजरीवाल ने संवाददाताओं से कहा, हम न्यायपालिका का सम्मान करते हैं, लेकिन कुछ परिस्थितियों के कारण हमें यह सत्याग्रह करना पड़ रहा है. मैंने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को पत्र में सभी विवरण दे दिए हैं. उन्होंने वीडियो में कहा कि मेरे सत्याग्रह पर जस्टिस स्वर्णकांता जो भी फैसला करेंगी, वो मुझे मंजूर होगा. मैं फैसले के अनुसार जो न्यायिक अधिकार मेरे पास हैं, मैं उनके अनुसार अपने अधिकारों का प्रयोग करूंगा और सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकता हूं.

बापू के बताए राह पर चलने का संकल्प

केजरीवाल ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा-आज मनीष जी और अन्य साथियों के साथ राजघाट पहुंच कर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को नमन किया. मेरी बापू से यही प्रार्थना है कि उनके दिखाए सत्याग्रह के मार्ग पर चलने के हमारे संकल्प को वे सदैव शक्ति दें. उन्होंने लिखा-मेरा अटूट विश्वास है कि बापू के आशीर्वाद से, सत्याग्रह के इस कठिन पथ पर हम पूर्ण निष्ठा के साथ अडिग रहेंगे. उनका मकसद न्यायपालिका को मजबूत करना और उसे कमजोर होने से बचाना है, ना कि उसका अपमान करना.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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