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Home National कांग्रेस ने मोदी सरकार पर जाति जनगणना को ठंडे बस्ते में डालने का लगाया आरोप

कांग्रेस ने मोदी सरकार पर जाति जनगणना को ठंडे बस्ते में डालने का लगाया आरोप

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कांग्रेस ने मोदी सरकार पर जाति जनगणना को ठंडे बस्ते में डालने का लगाया आरोप
जयराम रमेश, फोटो ANI

Caste Census: कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक पोस्ट में बताया कि सरकार ने 2021 में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया था. जिसमें कहा था, जाति जनगणना न कराने का एक नीतिगत फैसला किया है. मोदी सरकार ने जाति जनगणना की मांग करने के लिए कांग्रेस पर नक्सलवादी मानसिकता रखने का आरोप लगाया था.

जयराम रमेश ने पीएम मोदी पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाया

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा- पीएम मोदी देश को धोखा दे रहे हैं. जयराम रमेश ने टाइम लाइन देखकर पीएम मोदी और बीजेपी सरकार पर हमला बोला. उन्होंने एक्स पर लिखा.

20 जुलाई 2021 को लोकसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए कहा गया- भारत सरकार ने नीतिगत तौर पर यह फैसला किया है कि जनगणना में SC और ST के अलावा किसी अन्य जाति की आबादी की गिनती नहीं की जाएगी.

21 सितंबर 2021 को, मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया. जिसमें कहा गया कि उसने जाति जनगणना न कराने का एक सोच-समझकर लिया गया नीतिगत फैसला किया है.

28 अप्रैल 2024 को, एक टीवी इंटरव्यू में, प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर जाति जनगणना की वकालत करने के लिए शहरी नक्सली मानसिकता रखने का आरोप लगाया.

30 अप्रैल 2025 को, जब देश कुछ दिन पहले हुए पहलगाम आतंकी हमले के सदमे से अभी उबर ही रहा था, मोदी सरकार ने अचानक घोषणा की कि आने वाली जनगणना के हिस्से के तौर पर जाति जनगणना भी कराई जाएगी.

30 मार्च 2026 को, एक व्यापक रूप से चर्चित प्रेस कॉन्फ्रेंस में, रजिस्ट्रार-जनरल और जनगणना आयुक्त ने कहा कि चल रही जनगणना 2027 के ज्यादातर नतीजे 2027 में ही उपलब्ध हो जाएंगे, क्योंकि पूरी जनगणना डिजिटल माध्यम से की जा रही है.

मोदी सरकार अनुच्छेद 334-A में संशोधन करना चाहती है : जयराम रमेश

जयराम रमेश ने अपने पोस्ट में कहा- मोदी सरकार अनुच्छेद 334-A (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) में संशोधन करना चाहती है, यह कहते हुए कि जाति जनगणना के नतीजे कुछ सालों तक उपलब्ध नहीं होंगे – इस तथ्य को नजरअंदाज करते हुए कि बिहार और तेलंगाना दोनों ने छह महीने से भी कम समय में अपनी व्यापक जाति सर्वेक्षण प्रक्रिया पूरी कर ली थी. अब वह उस चीज में संशोधन करना चाहते हैं जिसे संसद ने सितंबर 2023 में सर्वसम्मति से पारित किया था. इसका छिपा हुआ एजेंडा बस यही है कि जाति जनगणना न हो.

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जाति जनगणना रोकने की मांग वाली याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने ‘बदतमीजी भरी भाषा’ पर लगाई फटकार

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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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