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ISRO: गगनयान मिशन की सफलता देश के आर्थिक विकास की गति को करेगी तेज

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ISRO: गगनयान मिशन की सफलता देश के आर्थिक विकास की गति को करेगी तेज

देश स्पेस क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है. स्पेस क्षेत्र में बड़ी कामयाबी हासिल करने के बाद भारत गगनयान मिशन पर काम कर रहा है. सरकार की लक्ष्य वर्ष 2035 तक स्पेस स्टेशन की स्थापना और वर्ष 2040 तक चंद्रमा पर भारतीय दल भेजने का है. इसके लिए कई स्तर पर तैयारी हो रही है और वर्ष 2027 में मानव रहित अंतरिक्ष उड़ान को पूरा करना है. इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए ह्यमन लांच व्हीकल का विकास हो चुका है और इसकी सफल टेस्टिंग हो गयी है. इसके अलावा ऑर्बिट मॉड्यूल का विकास किया गया है, जिसमें क्रू सदस्यों के लिए प्रोपल्शन सिस्टम और सर्विस मॉड्यूल की टेस्टिंग हो चुकी है. 


गगनयान मिशन के लिए गगनयान कंट्रोल सेंटर, गगनयान कंट्रोल फैसिलिटी, क्रू ट्रेनिंग फैसिलिटी, लांच पैड मॉडिफिकेशन का काम हो चुका है. गगनयान परियोजना पर होने वाला खर्च अन्य देशों द्वारा किए गए खर्च से काफी कम है. तकनीकी इनोवेशन और आर्थिक प्रोत्साहन को मिलाकर देखें तो इसका लाभ देश के लिए कई गुणा अधिक है. 

इस कार्यक्रम के कारण रोबोटिक्स, मटेरियल, इलेक्ट्रॉनिक्स और चिकित्सा में प्रगति जैसे कई तरह के लाभ हुए हैं. गगनयान सिर्फ इसरो का मिशन नहीं बल्कि देश का मिशन है. सरकार के नीतिगत सुधार के फैसले के कारण देश में स्पेस क्षेत्र में काम करने वाले स्टार्टअप की संख्या काफी बढ़ गयी है. 


क्या होगा आर्थिक फायदा

राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्रीय कार्मिक, स्पेस मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि देश में स्वदेशी गगनयान मिशन तकनीक के विकसित होने से स्पेस क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा और इससे घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को गति मिलेगी और इस मिशन की सफलता से फार्मास्यूटिकल, बायो मेडिकल, मटेरियल डेवलपमेंट, स्पेस टूरिज्म और इससे जुड़े अन्य क्षेत्रों में रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा. गगनयान मिशन के लिए चुने गए भारतीय वायु सेना के पायलटों का परीक्षण रूस में पूरा हो चुका है. 


देश में गगनयान मिशन का विस्तृत ट्रेनिंग मॉड्यूल और पाठ्यक्रम बनाया जा चुका है और साथ ही ट्रेनिंग सुविधा का भी विकास किया जा चुका है. मिशन के लिए टेस्ट व्हीकल के परीक्षण का काम लगातार चल रहा है. गगनयान भारत को आत्मनिर्भर अंतरिक्ष शक्ति के रूप में उभरने में मददगार होगा, जिससे वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और उद्यमियों की नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलेगी.  वर्ष 2026 में होने वाले मानवयुक्त मिशन के साथ ही भारत उन देशों के विशिष्ट समूह में शामिल हो जायेगा जो स्वतंत्र रूप से मानव अंतरिक्ष उड़ान की क्षमता विकसित कर सकता है. 

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