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Indo-Russia Relationship: संवाद और सहयोग से भारत-रूस संबंधों को और मिलेगी मजबूती

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Indo-Russia Relationship: संवाद और सहयोग से भारत-रूस संबंधों को और मिलेगी मजबूती

Indo-Russia Relationship: भारत और रूस के बीच संबंध काफी अच्छे रहे हैं. संवाद और सहयोग से भारत और रूस के संसदीय  संबंध और प्रगाढ़ होंगे. दोनों देशों की साझेदारी परस्पर विश्वास पर आधारित है और समय की कसौटी पर खरी उतरी हैं. भारत स्वतंत्रता के बाद से रूस के सबसे करीबी और विश्वसनीय भागीदारों में से एक रहा है और दोनों देशों के लोगों के बीच मित्रता और सहयोग पूरे विश्व के लिए एक उदाहरण  है. रशियन फेडरेशन की फेडरल असेंबली की फेडरेशन काउंसिल के फर्स्ट डेप्युटी स्पीकर व्लादिमीर याकुशेव के नेतृत्व में भारत यात्रा पर आए रूस के संसदीय शिष्टमंडल से मुलाकात के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने यह बात कही. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच हाल ही में हुए उच्च स्तरीय संपर्क और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच निरंतर संवाद से द्विपक्षीय संबंध और मजबूत हुआ है और सहयोग के नये मार्ग खुले हैं. दोनों पक्षों ने अंतर-संसदीय संघ (आईपीयू), ब्रिक्स संसदीय मंच और जी-20 जैसे बहुपक्षीय संसदीय मंचों पर सहयोग के महत्व को रेखांकित किया.

बिरला ने वैश्विक चुनौतियों का सामूहिक रूप से समाधान करने के लिए सहयोग की भावना को और मजबूत करने पर जोर देते हुए कहा कि रक्षा, व्यापार और आर्थिक सहयोग जैसे प्रमुख क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ाने की जरूरत है. साथ ही अंतरिक्ष अनुसंधान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और स्वच्छ ऊर्जा की पहचान उभरते क्षेत्रों में भी सहयोग की संभावना है. रूसी विश्वविद्यालयों में बड़ी संख्या में भारतीय छात्रों की उपस्थिति के साथ-साथ रूस में योग और भारतीय सिनेमा की लोकप्रियता, दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंध को दर्शाती है. मॉस्को में हाल ही में आयोजित सांस्कृतिक महोत्सव ‘भारत उत्सव’, में बड़ी संख्या में लोगों द्वारा भाग लिए जाने से रूसी नागरिकों के बीच भारतीय संस्कृति के प्रति बढ़ती रुचि का पता चलता है. इस मौके पर रशियन फेडरेशन की फेडरल असेम्बली की फेडरेशन काउंसिल के फर्स्ट डेप्युटी स्पीकर व्लादिमीर याकुशेव ने कहा कि भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी रूस के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. 

Harivansh
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आतंकवाद पर भारत के साथ खड़ा रहा है रूस


रूसी शिष्टमंडल ने राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश से भी मुलाकात की. इस दौरान उपसभापति ने कहा कि भारत और रूस के बीच संसदीय स्तर पर समृद्ध एवं सार्थक संवाद की परंपरा रही है. ड्यूमा के चेयरमैन व्याचेस्लाव वोलोडिन ने फरवरी 2025 में भारत का दौरा किया था और उन्होंने मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले और भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के संदर्भ में रूस की यात्रा पर कनिमोझी करुणानिधि के नेतृत्व वाले सर्वदलीय संसदीय शिष्टमंडल का भी उल्लेख करते हुए कहा कि आतंकवाद को लेकर रूस हमेशा भारत के रुख का समर्थन करता है. शिष्टमंडल की यात्रा से संसदीय सहयोग और अधिक सुदृढ़ होगा तथा दोनों देशों के बीच बढ़ते संपर्क को और गति मिलेगी. दिसंबर 2025 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान आयोजित 23 वां भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में हस्ताक्षरित समझौते और सहमति ज्ञापन से नये आयाम खुले हैं.

दोनों देशों के बीच व्यापार एवं आर्थिक सहयोग लगातार बढ़ रहा है और द्विपक्षीय व्यापार लगभग 70 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है, जो वर्ष 2025 के लिए  निर्धारित 30 अरब अमेरिकी डॉलर के वार्षिक लक्ष्य से अधिक है. वर्ष 2030 तक इसके 100 अरब अमेरिकी डॉलर होने की संभावना है. 
सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित करते हुए हरिवंश ने कहा कि अक्टूबर में कल्मकिया क्षेत्र में भारत के राष्ट्रीय संग्रहालय से भगवान शाक्यमुनि बुद्ध के पवित्र अवशेषों के प्रदर्शनी को अभूतपूर्व जन-प्रतिक्रिया मिली, जो दोनों देशों के बीच प्राचीन सांस्कृतिक संबंधों का प्रमाण है. भारत और रूस के बीच संयुक्त राष्ट्र, जी-20, ब्रिक्स तथा एससीओ जैसे मंचों पर सक्रिय गठजोड़ है. इस वर्ष भारत ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है. उपसभापति ने कहा कि दोनों पक्ष युवा एवं महिला संसद सदस्यों के बीच अधिक संपर्क बढ़ाने की दिशा में काम कर सकते हैं, जिससे द्विपक्षीय संबंध और सुदृढ़ होंगे. 

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