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भारत ने बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस एडी-1 इंटरसेप्टर के दूसरे चरण का किया सफल परीक्षण

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भारत ने बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस एडी-1 इंटरसेप्टर के दूसरे चरण का किया सफल परीक्षण

भुवनेश्वर : भारत ने बुधवार को ओडिशा के एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (बीएमडी) इंटरसेप्टर एडी-1 मिसाइल के दूसरे चरण का सफल परीक्षण किया. बीएमडी इंटरसेप्टर एडी-1 के साथ सभी बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस हथियार प्रणाली का भी सफल परीक्षण किया गया.

बीएमडी इंटरसेप्टर एडी-1 लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है. इस मिसाइल प्रणाली के जरिए आसमान से आसमान में ही लंबी दूरी पर स्थित दुश्मनों के बैलिस्टिक मिसाइलों और लड़ाकू विमानों को मार गिराया जा सकता है.

मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, बीएमडी इंटरसेप्टर एडी-1 के दूसरे चरण की मिसाइल प्रणाली को मजबूत मोटर द्वारा संचालित किया जाता है. इसके साथ ही, यह बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली स्वदेशी कंट्रोल सिस्टम, नेविगेशन और मार्गदर्शन एल्गोरिदम से लैस है.

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के अनुसार, इस मिसाइल प्रणाली ने सभी उप-प्रणालियों ने उड़ान परीक्षण के दौरान अपेक्षा के अनुसार प्रदर्शन किया और इसे रडार, टेलीमेट्री और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल ट्रैकिंग स्टेशनों सहित कई रेंज सेंसर द्वारा कैप्चर किए गए डेटा द्वारा नियंत्रित किया गया.

बता दें कि भारत ने पिछले महीने ओडिशा के एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से स्वदेश निर्मित मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि प्राइम का सफल परीक्षण किया था. उस समय पहले चरण के परीक्षण के दौरान मोबाइल लॉन्चर से हल्के मिसाइल का परीक्षण किया गया था.

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ठोस ईंधन वाली मिसाइल ने परीक्षण के दौरान सभी मिशन मापदंडों को पूरा किया. इसके सभी नेविगेशन को विभिन्न बिंदुओं से टेलीमेट्री इक्विपमेंट और रडार के द्वारा नियंत्रित किया गया था. इससे पहले, पिछले साल के 18 दिसंबर को ओडिशा के ही एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से इस मिसाइल का सफलतापूर्वक ट्रायल किया गया था.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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