[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home National LPG का देसी विकल्प बना रहा भारत, पुणे के वैज्ञानिकों ने तैयार किया DME फ्यूल, आम आदमी और देश का बचेगा खर्चा

LPG का देसी विकल्प बना रहा भारत, पुणे के वैज्ञानिकों ने तैयार किया DME फ्यूल, आम आदमी और देश का बचेगा खर्चा

0
LPG का देसी विकल्प बना रहा भारत, पुणे के वैज्ञानिकों ने तैयार किया DME फ्यूल, आम आदमी और देश का बचेगा खर्चा
गैस प्लांट की सांकेतिक तस्वीर. फोटो- कैनवा.

India DME Fuel LPG: भारत में रसोई गैस यानी LPG पर निर्भर करोड़ों परिवारों के लिए भविष्य में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. पुणे स्थित सीएसआईआर- नेशनल केमिकल लैबोरेटरी (CSIR-NCL) के वैज्ञानिक एक ऐसे स्वदेशी ईंधन पर काम कर रहे हैं, जिसे LPG का विकल्प माना जा रहा है. इस नए ईंधन का नाम DME यानी डाइमेथाइल ईथर है. वैज्ञानिकों का दावा है कि यह तकनीक भारत को ऊर्जा के मामले में ज्यादा आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर सकती है और विदेशी ईंधन आयात पर निर्भरता घटा सकती है.

क्या है DME और क्यों है खास?

परियोजना से जुड़े एक वैज्ञानिक ने कहा कि यह एक और लैब एक्सपेरीमेंट की तरह नहीं है. यह भारत के नेक्स्ट जेनरेशन का डीप टेक नवाचार है. DME एक साफ और वैकल्पिक ईंधन है, जिसे कोयला, बायोमास और मेथनॉल जैसे घरेलू संसाधनों से तैयार किया जा सकता है. वैज्ञानिकों के अनुसार, इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे देश के अंदर ही बड़े स्तर पर बनाया जा सकता है. इससे LPG आयात पर होने वाला भारी खर्च कम हो सकता है.

LPG की तरह इस्तेमाल किया जा सकेगा DME

परियोजना से जुड़े वैज्ञानिक टी राजा ने बताया कि DME और LPG के उपयोग में काफी समानता है. उन्होंने कहा कि DME को आसानी से LPG, प्रोपेन और ब्यूटेन के मिश्रण के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है. इसकी ऊष्मा क्षमता थोड़ी अलग जरूर है, लेकिन घरेलू और औद्योगिक उपयोग के लिए यह प्रभावी विकल्प साबित हो सकता है.

रसोई गैस से आगे भी हैं उपयोग

इस परियोजना से जुड़ी वैज्ञानिक समृद्धि माने ने बताया कि DME का इस्तेमाल केवल खाना पकाने तक सीमित नहीं रहेगा. उन्होंने कहा कि इसका उपयोग LPG आधारित ऑटो रिक्शा और कुछ मामलों में डीजल जनरेटर के विकल्प के रूप में भी किया जा सकता है.

शुरुआत में 20% ब्लेंडिंग का प्लान

वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि LPG को पूरी तरह बदलने की प्रक्रिया धीरे-धीरे होगी. शुरुआती चरण में 20 प्रतिशत DME और 80 प्रतिशत LPG का मिश्रण इस्तेमाल करने की योजना है. सबसे अहम बात यह है कि उपभोक्ताओं को इसके लिए नए सिलेंडर या गैस चूल्हे खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी. मौजूदा सिस्टम में ही इस मिश्रण का उपयोग संभव बताया जा रहा है.

ये भी पढ़ें:- DRDO वैज्ञानिक की बड़ी चेतावनी: भारत को CBRN खतरों से सतर्क रहने की जरूरत, इन बातों पर चेताया

विदेशी मुद्रा बचाने में मिलेगी मदद

परियोजना से जुड़े वैज्ञानिक आकाश भटकर ने कहा कि यदि भारत घरेलू LPG में 20 प्रतिशत DME मिश्रण का उपयोग शुरू करता है, तो इससे विदेशी मुद्रा पर पड़ने वाला बोझ काफी कम हो सकता है. भारत हर साल लगभग 60-67 प्रतिशत LPG आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा का भारी खर्च होता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि DME इस खर्च को घटाने में मददगार साबित हो सकता है.

ये भी पढ़ें:- एयर शो के दौरान हवा में टकराए दो अमेरिकी फाइटर जेट, जमीन पर बने आग का शोला, Video

युवा वैज्ञानिकों में उत्साह

इस परियोजना पर काम कर रहे युवा शोधकर्ताओं ने इसे देश के लिए महत्वपूर्ण पहल बताया. प्रोजेक्ट एसोसिएट शीतल गवली ने कहा कि यह सिर्फ एक रिसर्च प्रोजेक्ट नहीं बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा काम है. वहीं शोधकर्ता अदिति कांबले ने बताया कि समय के साथ इस तकनीक को बड़े स्तर पर विकसित किया जा रहा है ताकि इसका फायदा समाज तक पहुंच सके.

Previous article जनसुनवाई में पहुंचे 25 मामले, डीएम ने दिये त्वरित निष्पादन के निर्देश
Next article जहानाबाद में विकास योजनाओं को लेकर हुई अहम बैठक, 2045 विजन पर फोकस
Avatar Of Anant Narayan Shukla
अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel