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सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण, कितनी संपत्ति लूटकर ले गया महमूद गजनवी

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सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण, कितनी संपत्ति लूटकर ले गया महमूद गजनवी
सोमनाथ मंदिर की सांकेतिक तस्वीर

Somnath Mandir : गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में वेरावल कस्बे के पास स्थित ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर में 8 जनवरी को चार दिवसीय सोमनाथ स्वाभिमान पर्व शुरू हुआ. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 जनवरी से गुजरात का तीन दिवसीय दौरा करेंगे और 11 जनवरी को सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे. वे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अंतर्गत एक किलोमीटर लंबे रोड शो ‘शौर्य यात्रा’ का नेतृत्व भी करते नजर आएंगे. रोड शो में 108 घोड़े शामिल किये जाएंगे.

स्वाभिमान पर्व भारतीय सभ्यता की जीवटता को प्रदर्शित करने के लिए मनाया जाता है, जिसका प्रतीक सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण है. प्राचीन मंदिर को विदेशी आक्रांताओं ने बार-बार तबाह किया था और इसकी शुरूआत करीब 1,000 साल पहले महमूद गजनवी के हमले के साथ हुई थी. इस पर्व का आयोजन गजनी द्वारा सोमनाथ मंदिर पर किए गए पहले हमले के 1,000 वर्ष पूरे होने पर किया जा रहा है.

महमूद गजनवी के आक्रमण के बाद भी मंदिर को फिर से बनाया गया

सोमनाथ एक भव्य और प्रसिद्ध मंदिर है. यह मंदिर गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में वेरावल के पास प्रभास पाटन के समुद्र तट पर स्थित है जहां सैकड़ों  लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं. यह भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक है, इसलिए इसका धार्मिक महत्व बहुत ज्यादा ही है. सोमनाथ मंदिर का उल्लेख शिव पुराण के 13वें अध्याय में भी मिलता है. इतिहास में इस मंदिर को कई बार तोड़ा गया, लेकिन हर बार इसका पुनर्निर्माण करवाया गया. 11वीं शताब्दी में महमूद गजनवी के आक्रमण के बाद भी मंदिर को फिर से बनाया गया.

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सोमेश्वर कहा जाता था सोमनाथ को

सोमनाथ का स्थान प्राचीन काल से ही एक प्रमुख तीर्थ स्थल रहा है, क्योंकि यह त्रिवेणी संगम पर स्थित है. यहां कपिला, हिरण और सरस्वती नदियों का संगम होता है. girsomnath.nic.in पर मौजूद जानकारी के अनुसार, इस पवित्र स्थल का उल्लेख कई ऐतिहासिक अभिलेखों में मिलता है. गुर्जर-प्रतिहार वंश के राजा नागभट्ट द्वितीय ने अपने अभिलेखों में सौराष्ट्र के तीर्थों की यात्रा का उल्लेख किया है, जिनमें सोमनाथ भी शामिल था. इसे उस समय सोमेश्वर कहा जाता था.

दो करोड़ दीनार की संपत्ति अपने साथ ले गया महमूद गजनवी

1026 ईस्वी में भीम प्रथम के शासनकाल के दौरान तुर्की मुस्लिम शासक महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण कर उसे लूटा और ज्योतिर्लिंग को तोड़ा. वह लगभग दो करोड़ दीनार की अपार संपत्ति अपने साथ ले गया. इसके बाद भी मंदिर का महत्व कम नहीं हुआ. 1143 से 1172 के बीच शासन करने वाले राजा कुमारपाल ने 1169 के एक अभिलेख के अनुसार सोमनाथ मंदिर का उत्कृष्ट पत्थरों से पुनर्निर्माण कराया और इसे रत्नों से अलंकृत किया. उन्होंने पुराने और जर्जर लकड़ी के मंदिर के स्थान पर एक भव्य पत्थर का मंदिर बनवाया, जो आस्था और पुनर्जागरण का प्रतीक बना. 

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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