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Home National न थमी रफ्तार, न बुझा चूल्हा: होर्मुज के चक्रव्यूह को भारत ने ’41 दरवाजों’ से ऐसे तोड़ा

न थमी रफ्तार, न बुझा चूल्हा: होर्मुज के चक्रव्यूह को भारत ने ’41 दरवाजों’ से ऐसे तोड़ा

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न थमी रफ्तार, न बुझा चूल्हा: होर्मुज के चक्रव्यूह को भारत ने ’41 दरवाजों’ से ऐसे तोड़ा
होर्मुज पार कर भारत पहुंचने वाला भारतीय जहाज, फोटो पीटीआई

Strait of Hormuz: BPCL के पूर्व चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर जी कृष्णकुमार ने बताया- कैसे भारत ने पिछले 10 सालों में शांति के दिनों में जो तैयारी की थी, उसने संकट के समय देश को बचा लिया.

रिफाइनरी को राजनीति नहीं, सिर्फ कच्चे तेल से मतलब

जी कृष्णकुमार ने न्यूज एजेंसी एएनआई में लिखे अपने लेख में कहा- किसी भी रिफाइनरी को वैश्विक राजनीति (Geopolitics) से कोई फर्क नहीं पड़ता। उसे सिर्फ इस बात की चिंता होती है कि उसकी टंकियों में कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) आता रहे और सप्लाई समय पर हो. होर्मुज संकट के दौरान भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही थी, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 40% से ज्यादा कच्चा तेल, 80% से ज्यादा एलपीजी (LPG) और 55% से ज्यादा एलएनजी (LNG) इसी रास्ते से मंगाता था. इसके बावजूद, संकट के 100 दिनों के दौरान देश का एक भी पेट्रोल पंप खाली नहीं रहा, न ही रसोई गैस और सीएनजी की किल्लत हुई.

पड़ोसी देश हुए पस्त, भारत रहा मस्त

जहां एक तरफ इस संकट के कारण चीन को अपने कच्चे तेल के आयात में 45% की कटौती करनी पड़ी, वहीं जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों को अपने आपातकालीन भंडार (स्ट्रेटेजिक रिजर्व) पर निर्भर होना पड़ा. इसके विपरीत, भारत की रिफाइनरियों ने 100% क्षमता के साथ काम करना जारी रखा.

यह सफलता रातोंरात नहीं मिली. भारत ने पिछले दो दशकों में अपने तेल सप्लायर देशों की संख्या 27 (साल 2006-07) से बढ़ाकर 41 कर दी है. जब होर्मुज का रास्ता बंद हुआ, तो भारत ने रूस, अफ्रीका और अमेरिकी देशों से तेल मंगाकर कमी को तुरंत पूरा कर लिया.

उज्ज्वला लाभार्थियों को 642 रुपये में ही मिला सिलेंडर

एलपीजी के मोर्चे पर संकट सबसे बड़ा था क्योंकि 80% रसोई गैस होर्मुज के रास्ते ही आती है. सरकार ने तुरंत घरेलू रिफाइनरियों को एलपीजी का उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया, जिससे उत्पादन 35 हजार मीट्रिक टन से बढ़कर 54 हजार मीट्रिक टन रोजाना हो गया. साथ ही देश में एलपीजी टर्मिनल की संख्या 11 से बढ़कर 22 हो चुकी थी, जिससे नए रास्तों से गैस मंगाना आसान हुआ. सबसे बड़ी बात यह रही कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी सिलेंडर की कीमत 1,600 रुपये से पार होने के बावजूद, सरकार ने उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को 642 रुपये में ही सिलेंडर देना जारी रखा.

किसने उठाया नुकसान का बोझ?

जी कृष्णकुमार ने साफ किया कि इस संकट की एक बड़ी कीमत भी चुकानी पड़ी1 आम जनता को महंगे तेल और गैस से बचाने के लिए सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) ने सिर्फ पहली तिमाही में 61,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाया. इसके अलावा रसोई गैस की कीमतों को काबू में रखने के लिए 30,000 करोड़ रुपये अलग से खर्च किए गए. सरकार ने अपनी तरफ से एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) में कटौती कर इस पूरे वित्तीय झटके को खुद झेला, ताकि देश के बजट पर असर न पड़े.

भविष्य के लिए क्या है सीख?

पूर्व बीपीसीएल अध्यक्ष के मुताबिक, इस संकट से सीख लेते हुए भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करना होगा. उन्होंने सुझाव दिए कि भारत को बीकानेर और बीना में अपने रणनीतिक तेल भंडार (SPR) को और बढ़ाना चाहिए. एक अलग ‘एनर्जी सिक्योरिटी फंड’ (ऊर्जा सुरक्षा कोष) बनाना चाहिए. ओमान-गुजरात गहरे समुद्र के पाइपलाइन प्रोजेक्ट को तेजी से आगे बढ़ाना चाहिए. किसी भी एक क्षेत्र से तेल के आयात को कुल जरूरत के 40% से कम पर सीमित रखना चाहिए.

ये भी पढ़ें: ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट बंद करने की धमकी दी, अमेरिका को बताया धोखेबाज

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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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