[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home National धरती की बढ़ती गर्मी से दम तोड़ रहीं नदियां, घट रहा ऑक्सीजन, भारत के लिए भी खतरा

धरती की बढ़ती गर्मी से दम तोड़ रहीं नदियां, घट रहा ऑक्सीजन, भारत के लिए भी खतरा

0
धरती की बढ़ती गर्मी से दम तोड़ रहीं नदियां, घट रहा ऑक्सीजन, भारत के लिए भी खतरा
नदियों में कम होती जा रही है ऑक्सीजन, फोटो-एआई

Global Warming: दुनिया के देशों में तापमान में बढ़ोतरी का सीधा असर नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है. एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि दुनिया की नदियों में धीरे-धीरे ऑक्सीजन की मात्रा कम हो रही है, जिससे मछलियों और अन्य जलीय जीवों का अस्तित्व संकट में पड़ सकता है.

चीन के वैज्ञानिकों की ओर से किए गए इस अध्ययन में उपग्रह आंकड़ों और कृत्रिम मेधा (AI) की मदद से साल 1985 से दुनिया की 21,000 से अधिक नदियों के ऑक्सीजन स्तर का विश्लेषण किया गया. यह अध्ययन साइंस एडवांस पत्रिका (Science Advances) में प्रकाशित हुआ है. अध्ययन के अनुसार 1985 के बाद से वैश्विक स्तर पर नदियों में ऑक्सीजन की मात्रा औसतन 2.1 प्रतिशत घट चुकी है. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह गिरावट भले ही पहली नजर में मामूली लगे, लेकिन लंबे समय में इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं.

गर्म पानी में कम होती है ऑक्सीजन

शोधकर्ताओं के अनुसार रसायन विज्ञान (Chemistry) और भौतिकी (Physics) के मूल सिद्धांतों के अनुसार गर्म पानी में ऑक्सीजन की घुलनशीलता कम होती है. जलवायु परिवर्तन के कारण पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है, जिससे नदियों और झीलों का पानी भी गर्म हो रहा है. जिसके कारण पानी में मौजूद ऑक्सीजन तेजी से वातावरण में निकल जाती है. अध्ययन में पाया गया कि यदि वर्तमान रफ्तार जारी रही, तो इस सदी के अंत तक दुनिया की नदियां औसतन चार प्रतिशत अतिरिक्त ऑक्सीजन खो सकती हैं. कुछ क्षेत्रों में यह गिरावट पांच प्रतिशत तक पहुंचने की आशंका है.

‘जीवनविहीन क्षेत्र’ बनने का बढ़ता खतरा

अध्ययन के प्रमुख लेखक और चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंस (Chinese Academy of Sciences) के पर्यावरण वैज्ञानिक ची गुआन के अनुसार डीऑक्सीजनेशन (ऑक्सीजन की कमी) धीरे-धीरे गंभीर रूप ले रही है. उन्होंने कहा कि यदि यह प्रक्रिया लंबे समय तक जारी रही तो कई नदियों में ‘जीवनविहीन क्षेत्र’ बनने लगेंगे, जहां मछलियां और अन्य जलीय जीव जीवित नहीं रह पाएंगे. ऐसी स्थिति पहले से ही मैक्सिको की खाड़ी, चेसापीक खाड़ी और लेक एरी जैसे क्षेत्रों में देखी जा चुकी है. वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी कि ऑक्सीजन की कमी से जैव विविधता में गिरावट, जल गुणवत्ता खराब होने और बड़े पैमाने पर मछलियों की मौत जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं.

भारत और अमेजन क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित

अध्ययन में कहा गया है कि भारत की अत्यधिक प्रदूषित गंगा नदी में इस सदी की शुरुआत में ऑक्सीजन की कमी वैश्विक औसत की तुलना में लगभग 20 गुना तेजी से दर्ज की गई. विश्लेषण के मुताबिक, यदि कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन (Emissions) मौजूदा स्तर पर बढ़ता रहा, तो इस सदी के अंत तक भारत, पूर्वी अमेरिका, आर्कटिक और दक्षिण अमेरिका की कई नदियां अपनी लगभग 10 प्रतिशत ऑक्सीजन खो सकती हैं.

नीदरलैंड के ‘यूट्रेक्ट विश्वविद्यालय’ में जल विज्ञान के प्रोफेसर मार्क बीरकेंस ने कहा कि उनके और उनके सहयोगियों के पिछले साल किए गए अध्ययन में पाया गया कि दुनिया की नदियों में ऑक्सीजन संकट हर दशक में 13 दिन बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे धरती और गर्म होगी, ये आंकड़े और तेजी से बढ़ सकते हैं. शोधकर्ताओं ने विशेष रूप से अमेजन नदी को लेकर चिंता जताई है. पिछले साल (2025) में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया था कि 1980 के बाद से अमेजन में जीवनविहीन दिनों की संख्या हर दशक में लगभग 16 दिन बढ़ रही है.

प्रदूषण और बांध भी बढ़ा रहे संकट

वैज्ञानिकों के अनुसार, नदियों में ऑक्सीजन की कमी के पीछे केवल तापमान बढ़ना ही जिम्मेदार नहीं है. उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग, शहरों से निकलने वाला अपशिष्ट (कचरा), बांधों का निर्माण, जल प्रवाह में बदलाव और मौसम संबंधी परिस्थितियां भी इस समस्या को गंभीर बना रही हैं. हालांकि अध्ययन में पाया गया कि करीब 63 प्रतिशत समस्या सीधे तौर पर पानी के बढ़ते तापमान से जुड़ी हुई है.

ड्यूक यूनिवर्सिटी (Duke University) की पारिस्थितिकीविद और जैव-भू-रसायन विशेषज्ञ एमिली बर्नहार्ट ने कहा कि जैसे-जैसे नदियों का पानी गर्म हो रहा है, पहले से मौजूद प्रदूषण की समस्याएं और खतरनाक रूप लेती जा रही हैं. उन्होंने कहा कि नदियों में प्रदूषण कम करना अब पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है, लेकिन बढ़ते तापमान के कारण यह चुनौती लगातार कठिन होती जा रही है.

Also Read: अगले 7 दिन भारी बारिश, गरज-चमक और आंधी का खतरा, IMD ने जारी किया अलर्ट

Previous article आम आदमी पार्टी ने किया पीएम का पुतला दहन
Next article जिस महिला व तीन बच्चों की हत्या के आरोप में दर्ज करायी थी प्राथमिकी, सभी देवघर में सकुशल हुए बरामद
Avatar Of Pritish Sahay
प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel