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Home National किसानों का ‘दिल्ली चलो मार्च’ 12 बजे से, शंभू बॉर्डर पर डटे, बैरिकेडिंग कर कांटेदार तार बिछाए गए

किसानों का ‘दिल्ली चलो मार्च’ 12 बजे से, शंभू बॉर्डर पर डटे, बैरिकेडिंग कर कांटेदार तार बिछाए गए

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किसानों का ‘दिल्ली चलो मार्च’ 12 बजे से, शंभू बॉर्डर पर डटे, बैरिकेडिंग कर कांटेदार तार बिछाए गए
Farmers Protest

Farmers Protest : किसानों का ‘दिल्ली चलो’मार्च आज आयोजित किया जाना है, जिसे लेकर किसान शंभू बॉर्डर पर डटे हुए हैं. किसानों के ‘दिल्ली चलो’ को लेकर मौके पर पुलिसकर्मियों की तैनाती कर दी गई है और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं. शंभू बॉर्डर पर पुलिस ने बैरिकेडिंग कर दी है, ताकि किसानों आगे बढ़ने से रोका जाए.

रविवार को दोपहर 12 बजे किसानों का जत्था दिल्ली के लिए रवाना होने की घोषणा की गई थी. इस संबंध में किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने शनिवार को मीडिया को जानकारी दी थी. संभावना है कि हजारों की संख्या में किसान अपनी मांगों के समर्थन में दिल्ली रवाना होने वाले हैं.

किसानों ने केंद्र सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

किसान नेता सरवन सिंह ने शनिवार को केंद्र सरकार को किसान विरोधी बताया और कहा कि सरकार ने किसानों पर अत्याचार किया है.वे किसानों को एमएसपी भी नहीं दे रही है और केंद्रीय मंत्री संसद में झूठ बोल रहे थे. किसान सरकार की नीयत को समझ चुके हैं और इसलिए वे राजधानी में प्रदर्शन करेंगे.

शंभू बॉर्डर पर की गई बैरिकेडिंग

किसानों के दिल्ली चलो मार्च को देखते हुए रविवार सुबह से ही शंभू बॉर्डर पर बैरिकेडिंग कर दी गई है. हालांकि किसानों ने शुक्रवार को बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की और पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी दागे. किसानों को रोकने के लिए र्डर पर कांटे बिछाए जा रहे हैं.

एमएसपी पर कानूनी गारंटी की मांग कर रहे हैं किसान

किसानों ने अपनी मांगों के समर्थन में एक बार फिर आंदोलन शुरू कर दिया है, उनकी प्रमुख मांगे इस प्रकार हैं-
-एमएसपी पर कानूनी गारंटी की मांग

  • कीमत स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार तय की जाए.
    -किसानों की कर्ज माफी की मांग
    -आंदोलन में मारे गए किसानों के परिवार को मुआवजा देने की मांग
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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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