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Election Commission: मतदान के दिन पेड लीव को किया गया अनिवार्य

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Election Commission: मतदान के दिन पेड लीव को किया गया अनिवार्य

Election Commission: चुनाव के दौरान मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए चुनाव आयोग की ओर से कई स्तर पर तैयारी की जाती है. चुनाव आयोग की कोशिश अधिक से अधिक लोगों को मतदान के लिए प्रोत्साहित करने पर होता है. बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव और उपचुनाव में अधिक से अधिक मतदान सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग ने मतदान के दिन पेड लीव (सवेतन अवकाश) का ऐलान किया है. 

बिहार में दो चरण में विधानसभा चुनाव होना है. पहले चरण के लिए मतदान 6 नवंबर और दूसरे चरण के लिए 11 नवंबर को होगा. वहीं सभी 8 विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनाव भी 11 नवंबर को होंगे. 
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 135 बी के अनुसार किसी भी व्यवसाय, व्यापार, औद्योगिक उपक्रम या किसी अन्य प्रतिष्ठान में कार्यरत प्रत्येक व्यक्ति, जो लोक सभा या किसी राज्य, केंद्र शासित प्रदेश की विधान सभा के चुनाव में मतदान करने का हकदार है उसे मतदान के दिन वेतन सहित अवकाश मिलेगा. 

ऐसे वेतन सहित अवकाश के कारण वेतन में कोई कटौती नहीं होगी. इन प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले किसी भी नियोक्ता पर जुर्माना लगाया जाएगा. सभी दैनिक वेतनभोगी और आकस्मिक कर्मचारी भी मतदान के दिन वेतन सहित अवकाश के हकदार हैं.

मतदान बढ़ाना है मकसद

चुनाव आयोग का कहना है कि मतदान बढ़ाने के लिए यह कदम उठाना जरूरी है. ऐसे मतदाता (आकस्मिक और दैनिक वेतनभोगी श्रमिकों सहित) जो अपने निर्वाचन क्षेत्र के बाहर स्थित औद्योगिक या वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में कार्यरत हैं या नियोजित हैं, लेकिन मतदान वाले निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता के रूप में पंजीकृत हैं, वे भी मतदान के दिन वेतन सहित अवकाश के लाभ के हकदार होंगे. 
आयोग ने सभी राज्य, केंद्र शासित प्रदेश की सरकार को इन प्रावधानों का सख्ती से पालन करने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा है. ताकि सभी मतदाता स्वतंत्र और सुविधाजनक तरीके से अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें. 


गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने मतदान के दिन ड्यूटी पर तैनात सरकारी कर्मचारियों के लिए पोस्टल बैलट से मतदान की प्रक्रिया को सरल बनाने का काम किया है. आयोग मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए जनसंपर्क के हर तरीके का इस्तेमाल करने पर जोर दिया है. 

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