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Election Commission: बूथ लेवल अधिकारियों के इंसेंटिव को किया गया दोगुना

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Election Commission: बूथ लेवल अधिकारियों के इंसेंटिव को किया गया दोगुना

Election Commission: बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण(एसआईआर) कर रहा है. भले ही चुनाव आयोग के इस प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं, लेकिन इसे अंजाम देने का काम बूथ लेवल कर्मचारी(बीएलओ) बखूबी निभा रहे हैं. बीएलओ की सक्रियता के कारण चुनाव आयोग एक महीने के अंदर बिहार में मतदाता सूची का ड्राफ्ट मसौदा जारी करने में सफल रहा. इस सफलता को देखते हुए चुनाव आयोग ने बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बूथ लेवल कर्मचारियों के पारिश्रमिक को बढ़ाने का फैसला लेते हुए इसे दोगुना कर दिया. 

आयोग के फैसले के तहत बीएलओ कर्मचारियों को अब सालाना 12 हजार रुपये का वार्षिक इंसेंटिव मिलेगा. वर्ष 2015 से बीएलओ का इंसेंटिव 6 हजार रुपये था. इसके अलावा बीएलओ को मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए पहले एक हजार रुपये मिलता था, जिसे बढ़ाकर दो हजार रुपये कर दिया गया है.

वहीं बीएलओ पर्यवेक्षक को अब 12 हजार रुपये की बजाय 18 हजार रुपये का पारिश्रमिक मिलेगा. आयोग की ओर से मुहैया करायी गयी जानकारी के मुताबिक 10 साल बाद पारिश्रमिक में वृद्धि किया गया है. साथ ही साथ पहली बार इआरओ यानी निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी और एईआरओ यानी सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी के लिए मानदेय दिया गया है.


बीएलओ का इंसेंटिव हुआ दोगुना

चुनाव आयोग ने दस साल बाद बीएलओ के पारिश्रमिक को दोगुना किया है. बिहार में एसआईआर की प्रक्रिया को पूरा करने में बीएलओ का अहम योगदान रहा है. चुनाव आयोग की मंशा पूरे देश के मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की है. बिहार के बाद पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु जैसे राज्यों में एसआईआर की प्रक्रिया शुरू होने वाली है. विपक्षी दलों के विरोध के बावजूद चुनाव आयोग एसआईआर के स्टैंड पर कायम रहा.

इस मामले काे लेकर विपक्षी दलों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दाखिल की गयी, लेकिन अदालत ने इस मामले में रोक लगाने से इंकार कर दिया. संसद में विपक्षी दलों की ओर से एसआईआर पर चर्चा कराने की मांग को लेकर हंगामा जारी है. सरकार साफ कर चुकी है कि इस मामले पर चर्चा संभव नहीं है. विपक्षी दलों का आरोप है कि आयोग के एसआईआर कराने से गरीबों को मतदान से वंचित होना पड़ेगा.

हर स्तर पर विरोध के बावजूद एसआईआर की सफलता के बाद चुनाव आयोग की ओर से बीएलओ का वेतनमान बढ़ाने का निर्णय लिया गया. इस फैसले से बीएलओ आने वाले समय में एसआईआर की प्रक्रिया को और अधिक सक्रियता से करने का काम करेंगे और पूरे देश में यह प्रक्रिया सही तरीके से पूरी हो सकेगी. 

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