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Home National ऐसे चलता था अंडाणु दान का खेल, महिलाओं को दिए जाते थे इंजेक्शन

ऐसे चलता था अंडाणु दान का खेल, महिलाओं को दिए जाते थे इंजेक्शन

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ऐसे चलता था अंडाणु दान का खेल, महिलाओं को दिए जाते थे इंजेक्शन
अंडाणु दान गैंग का भंडाफोड़ (सांकेतिक तस्वीर)

Egg Donation Gang : महाराष्ट्र के ठाणे जिले में पुलिस ने अंडाणु दान से जुड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है. इसमें करोड़ों रुपये के लेन-देन की आशंका जताई जा रही है. अधिकारियों ने बताया कि यह गिरोह ने इकोनॉमिकली वीक महिलाओं को लालच देकर उनका शोषण कर रहा था. पीड़ित महिलाओं को हर चक्र के लिए 25,000 से 30,000 रुपये तक का लालच दिया जाता था. उन्हें बार-बार अंडाणु दान के लिए इस्तेमाल किया जाता था, जिससे उनका शारीरिक शोषण होता था.

रिहायशी बिल्डिंग और एक सोनोग्राफी केंद्र से ऑपरेट होता था सारा खेल

अधिकारियों के अनुसार, उन्हें आईवीएफ केंद्रों में ले जाया जाता था, जहां सर्जरी के जरिए अंडाणु निकाले जाते थे. बाद में उन्हें लाखों रुपये में बेचा जाता था. अब तक करीब 20 महिलाओं के इस रैकेट का शिकार होने की आशंका जताई गई है. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस अवैध कारोबार के सिलसिले में तीन महिलाओं को गिरफ्तार किया गया है. यह गिरोह बदलापुर पूर्व के जोवेली इलाके में एक रिहायशी बिल्डिंग और एक सोनोग्राफी केंद्र से ऑपरेट किया जा रहा था.

कैसे हुआ अंडाणु दान मामले का खुलासा

अंडाणु दान में एक महिला दूसरी महिला को गर्भधारण में मदद के लिए अपने अंडाणु देती है. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सुलक्षणा गाडेकर (44), अश्विनी चबूकस्वर (29) और मंजुषा वानखेड़े (46) के रूप में हुई है. पुलिस के अनुसार, एक पीड़िता ने ठाणे की उप-जिला अस्पताल की चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. ज्योत्स्ना सावंत को इस मामले की सूचना दी थी. सूचना मिलने के बाद हाल में सुलक्षणा गाडेकर के नैनो सिटी बिल्डिंग स्थित आवास पर छापेमारी की गई.

क्या लगा पुलिस के हाथ?

पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि आरोपियों के मोबाइल फोन से गर्भधारण में इस्तेमाल किए जाने वाले इंजेक्शनों की तस्वीरें, सोनोग्राफी रिपोर्ट, फर्जी नामों से बनाए गए हलफनामे, नकली दस्तावेज और पैसों के लेन-देन के सबूत बरामद किए गए हैं. पीड़ित महिलाओं को अंडाणुओं के उत्पादन को बढ़ाने के लिए हार्मोन संबंधित इंजेक्शन दिए जाते थे. उन्हें बार-बार अंडाणु दाताओं के रूप में इस्तेमाल किया जाता था. इस संबंध में सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के तहत मामला दर्ज किया गया है. 

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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