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Home National DU: समावेशी शिक्षा को लेकर देश-दुनिया के विशेषज्ञों ने किया मंथन

DU: समावेशी शिक्षा को लेकर देश-दुनिया के विशेषज्ञों ने किया मंथन

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DU: समावेशी शिक्षा को लेकर देश-दुनिया के विशेषज्ञों ने किया मंथन

DU: देश में बढ़ती आबादी की जरूरतों को पूरा करने के लिए ऑनलाइन दूरस्थ,  डिजिटल और अन्य माध्यम के जरिये उच्च शिक्षा मुहैया कराना समावेशी राष्ट्रीय विकास के लिए जरूरी है. इस बाबत दिल्ली विश्वविद्यालय(डीयू) के दूरस्थ एवं सतत शिक्षा विभाग, स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग, मुक्त शिक्षा परिसर द्वारा राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) एवं ब्रिटिश काउंसिल के सहयोग से आयोजित ‘मुक्त, दूरस्थ, डिजिटल एवं मिश्रित शिक्षण में उभरती प्रवृत्तियां एवं चुनौतियां’ विषय पर पहला अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन विज्ञान भवन में किया गया. 

 इस तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत एवं विदेशों से बड़ी संख्या में प्रतिनिधियों की सहभागिता रही. सम्मेलन में मुख्य वक्तव्य, पूर्ण सत्र, शोध पत्र एवं पोस्टर प्रस्तुति, परिचर्चा और उभरती हुई शैक्षिक तकनीक पर गहन मंथन किया गया. प्रमुख विषय  में शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता(एआई), नवाचारी शिक्षण पद्धति, मूल्यांकन सुधार, शिक्षार्थी सहभागिता, समानता एवं समावेशन, रोजगारोन्मुखी एवं सतत मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा पर चर्चा की गयी.सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि भारत की विशाल युवा जनसंख्या को ऑनलाइन, दूरस्थ शिक्षा मुहैया कराना जरूरी है. विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए शिक्षा का सशक्तिकरण, इनोवेशन, उद्यमिता और सामाजिक गतिशीलता जरूरी है. ताकि युवा नागरिक राष्ट्र के निर्माण में सार्थक योगदान दे सकें.

 भारत की ज्ञान साझा करने की परंपरा मुक्त शैक्षिक संसाधनों, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट तथा राष्ट्रीय डिजिटल विश्वविद्यालय जैसी पहल के कारण मजबूत हो रही है. यह सुधार उच्च शिक्षा में पहुंच, लचीलापन और गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए तकनीक के प्रभावी उपयोग और भारत को किफायती और व्यापक अधिगम के वैश्विक केंद्र के रूप में सशक्त बनाने का काम कर रहे हैं. 


मौजूदा जरूरत को पूरा करने के लिए जरूरी

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दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह ने कहा कि दूरस्थ शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए डीयू अग्रणी भूमिका निभा रहा है.  मुक्त शिक्षा विद्यालय और मुक्त शिक्षा परिसर के जरिये समावेशी, लचीली और भविष्य-उन्मुख शिक्षा प्रदान करने के लिए डीयू लगातार कदम उठा रहा है. यह सम्मेलन नीति संवाद, शैक्षणिक आदान-प्रदान और डिजिटल एवं मिश्रित अधिगम में वैश्विक श्रेष्ठ अनुभवों के साझा करने का एक महत्वपूर्ण मंच है. मुक्त शिक्षा परिसर की निदेशक प्रोफेसर पायल मागो और मुक्त शिक्षा विद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर अजय जायसवाल ने  मुक्त और दूरस्थ शिक्षा के प्रभावी क्रियान्वयन में इनोवेशन, गुणवत्ता, शिक्षार्थी सहायता प्रणालियों तथा शिक्षकों की क्षमता निर्माण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह सम्मेलन राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में तय राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप संस्थागत पहलों को मजबूत करने का काम कर रहा है. 


गौरतलब है कि  गौरतलब है कि इस तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत एवं विदेशों से बड़ी संख्या में प्रतिनिधियों की सहभागिता रही. सम्मेलन में मुख्य वक्तव्य, पूर्ण सत्र, शोध पत्र एवं पोस्टर प्रस्तुति, परिचर्चा और उभरती हुई शैक्षिक तकनीक पर गहन मंथन किया गया. प्रमुख विषय  में शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता(एआई), नवाचारी शिक्षण पद्धति, मूल्यांकन सुधार, शिक्षार्थी सहभागिता, समानता एवं समावेशन, रोजगारोन्मुखी एवं सतत मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा पर चर्चा की गयी. सम्मेलन की कार्यवाहियों के तहत दूरस्थ एवं सतत शिक्षा विभाग, मुक्त शिक्षा विद्यालय, मुक्त शिक्षा परिसर, दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा विज्ञान भवन में मुक्त शिक्षा विद्यालय के मेधावी विद्यार्थियों के लिए एक सम्मान समारोह का भी आयोजन किया गया. 

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