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DU: देश के पहले वित्त मंत्री होते डॉक्टर अंबेडकर तो विकसित राष्ट्र होता भारत

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DU: देश के पहले वित्त मंत्री होते डॉक्टर अंबेडकर तो विकसित राष्ट्र होता भारत

DU: देश में 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाया जाता है. सोमवार को संविधान दिवस के मौके पर दिल्ली विश्वविद्यालय(डीयू) के दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (डीएसई) एवं सेंटर फॉर सोशल डेवलपमेंट (सीएसडी) की ओर से डॉक्टर बीआर अंबेडकर की पुस्तक ‘द इवोल्यूशन ऑफ प्रोविंशियल फाइनेंस इन ब्रिटिश इंडिया: ए स्टडी इन द प्रोविंशियल डिसेंट्रलाइजेशन ऑफ इंपीरियल फाइनेंस’ पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन हुआ. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय कानून एवं  न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि पूरी दुनिया बाबा साहब को विख्यात अर्थशास्त्री मानती है. ब्रिटिश शासन काल में अंग्रेजों के सिस्टम को चैलेंज करना कोई आसान बात नहीं थी, लेकिन डॉक्टर अंबेडकर ने ऐसा काम किया. उनके द्वारा लिखित पुस्तक ‘द इवोल्यूशन ऑफ प्रोविंशियल फाइनेंस इन ब्रिटिश इंडिया: ए स्टडी इन द प्रोविंशियल डिसेंट्रलाइजेशन ऑफ इंपीरियल फाइनेंस’ लगभग 100 साल पहले लिखी गयी.

देश जब आजाद हुआ तो केंद्र और राज्यों के बीच संबंधों व संसाधनों के बंटवारे और वित्त आयोग के गठन को लेकर 56 बैठकें हुई और सभी बैठकों में बाबा साहब बीआर अंबेडकर उपस्थित रहे और कई बैठक में इस पुस्तक की चर्चा की गयी. कुछ लोग तो बाबा साहब को सिर्फ संविधान निर्माता, दलितों के मसीहा और आरक्षण समर्थक तक ही सीमित कर देते हैं और उनके अन्य योगदान की चर्चा नहीं करते हैं. लेकिन वे पत्रकार, आर्थिक मामलों के जानकार, मनोवैज्ञानिक और और एंथ्रोपोलॉजिस्ट भी थे. मेघवाल ने कहा कि अंबेडकर ने अपनी यह पुस्तक महाराजा बड़ौदा सयाजीराव गायकवाड़ को समर्पित की थी, क्योंकि महाराजा सियाजीराव ने उन्हें पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप दी थी. यह हमें सिखाता है कि अगर कोई हमारे लिए कुछ करे तो हमें उसका आभार प्रकट करना चाहिए.

शहरीकरण के हिमायती थे बाबा साहेब


कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डीयू कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह ने कहा कि डॉक्टर बीआर अंबेडकर का पूरा जोर शहरीकरण पर था. वह ग्रामीण क्षेत्रों में भी शहरी सुविधाएं मुहैया कराने के पैरोकार थे. उस समय भी उनका मानना था कि देश के आर्थिक विकास के लिए भारी उद्योगों की स्थापना जरूरी है. कुलपति ने कहा कि अगर 1952 में वह देश के पहले वित्त मंत्री होते तो भारत काफी पहले विकसित राष्ट्र बन चुका होता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का जो संकल्प नहीं लेना पड़ता.

अंबेडकर भारत की सरकार के आदर्श हैं और भारत के प्रधानमंत्री के पथ प्रदर्शक हैं. भले ही उनका अध्ययन किसी क्षेत्र में रहा हो, लेकिन हमेशा देश के कल्याण को प्रमुखता से आगे रखा. इस दौरान डीन ऑफ कॉलेज प्रोफेसर. बलराम पाणी, दक्षिणी परिसर की निदेशक प्रोफेसर. रजनी अब्बी और रजिस्ट्रार डॉक्टर विकास गुप्ता सहित कई कॉलेज के प्रिंसिपल, शिक्षक और छात्र मौजूद रहे. 

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