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Home National शपथ लेने की बात पर बोले डीके शिवकुमार- उन्हें नहीं पता है कि कब विधायक दल के नेता चुने जाएंगे

शपथ लेने की बात पर बोले डीके शिवकुमार- उन्हें नहीं पता है कि कब विधायक दल के नेता चुने जाएंगे

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शपथ लेने की बात पर बोले डीके शिवकुमार- उन्हें नहीं पता है कि कब विधायक दल के नेता चुने जाएंगे
डीके शिवकुमार

DK Shivakumar : कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद डीके शिवकुमार के बारे में यह कहा जा रहा है कि वे प्रदेश के अगले मुख्यमंत्री होंगे. हालांकि मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के मसले पर डीके शिवकुमार का कहना है कि उन्हें नहीं पता है कि कब विधायक दल के नेता चुने जाएंगे और इस बारे में क्या निर्णय हुआ है. शपथ लेने का निर्णय उसके बाद ही होगा. डीके शिवकुमार ने शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी से भी मुलाकात की और प्रदेश की राजनीतिक स्थिति पर चर्चा की.

राज्यसभा उम्मीदवारों की घोषणा अन्य राज्यों के साथ

कर्नाटक के उपमु्ख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की घोषणा के बारे में कहा कि कर्नाटक के उम्मीदवारों की घोषणा हम दूसरे राज्यों की लिस्ट के साथ करेंगे. मुझे यही जानकारी मिली है. इससे ज्यादा की जानकारी पार्टी हाईकमान के पास से आपको मिल सकती है. यह मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं आता.

सिद्धारमैया जाएंगे राज्यसभा, बेटे यतींद्र को मिलेगी कैबिनेट में जगह

जब से कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की बात हो रही है, यही समीकरण बताया जा रहा है कि सिद्धारमैया राज्यसभा जाएंगे और उनकी जगह पर डीके शिवकुमार कर्नाटक सरकार का नेतृत्व करेंगे.यह भी चर्चा है कि सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र को उपमुख्यमंत्री या कैबिनेट मंत्री का ओहदा मिल सकता है. यतींद्र, पिता सिद्धारमैया के साथ दिल्ली दौरे पर हैं और उन्होंने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से भी मुलाकात की है. इस मुलाकात के बाद यह चर्चा और भी तेज हो गई है कि यतींद्र का कर्नाटक में कद बढ़ेगा.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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