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Home National पिता की जान बचाने के लिए 17 साल के बेटे को कोर्ट ने दी लिवर डोनेट करने की इजाजत, जानें पूरा मामला

पिता की जान बचाने के लिए 17 साल के बेटे को कोर्ट ने दी लिवर डोनेट करने की इजाजत, जानें पूरा मामला

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पिता की जान बचाने के लिए 17 साल के बेटे को कोर्ट ने दी लिवर डोनेट करने की इजाजत, जानें पूरा मामला
दिल्ली हाईकोर्ट के गेट पर मीडियाकर्मियों की भीड़, फोटो एक्स

Minor Donate Liver: कोर्ट ने वसंत कुंज स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (ILBS) को निर्देश दिया है कि वे सभी कानूनी, नैतिक और मेडिकल नियमों का सख्ती से पालन करते हुए जल्द से जल्द यह ट्रांसप्लांट पूरा करें. जिससे नाबालिग की सेहत को कोई खतरा न हो.

क्या है पूरा मामला?

जस्टिस मिनी पुष्करणा की कोर्ट ने यह आदेश एक नाबालिग लड़के की याचिका पर दिया, जो उसने अपनी मां के जरिए दायर की थी. याचिका में लड़के ने ‘मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994’ के तहत अपने पिता उत्तम कुमार शॉ को लिवर का एक हिस्सा दान करने की अनुमति मांगी थी. पिता लंबे समय से लिवर की गंभीर बीमारी (क्रॉनिक लिवर डिजीज) से जूझ रहे हैं.

मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994 क्या है?

यह भारत सरकार द्वारा पारित एक महत्वपूर्ण कानून है. इसका मुख्य उद्देश्य इंसानी अंगों के व्यापार (खरीद-बिक्री) को रोकना और जरूरतमंद मरीजों के लिए अंगों के सही और कानूनी ट्रांसप्लांट को बढ़ावा देना है.

क्यों खास है यह फैसला?

आम तौर पर पाबंदी: देश के कानून के मुताबिक, नाबालिग बच्चों का अंग दान करना पूरी तरह प्रतिबंधित है. लेकिन साल 2014 के नियमों (नियम 5(3)(g)) के तहत, बेहद गंभीर और असाधारण मेडिकल स्थितियों में इसकी इजाजत दी जा सकती है. इसके लिए सरकार और संबंधित अथॉरिटी की मंजूरी जरूरी होती है.

एलजी की मंजूरी: सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने कोर्ट को बताया कि दिल्ली के उपराज्यपाल (LG) और सक्षम अथॉरिटी ने 29 जून 2026 को ही नाबालिग को अपने पिता को अपने जिगर का एक हिस्सा दान करने की अनुमति दी गई थी.

कोर्ट ने क्यों दी मंजूरी?

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि मरीज (पिता) लिवर सिरोसिस और कैंसर (हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा) जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं. उनकी जान बचाने का इकलौता रास्ता लिवर ट्रांसप्लांट ही है. परिवार के बाकी सदस्यों की मेडिकल जांच की गई, लेकिन सिर्फ नाबालिग बेटा ही मेडिकल रूप से फिट पाया गया.

बिना किसी दबाव के फैसला

कोर्ट ने नोट किया कि लड़का करीब साढ़े 17 साल का है. वह शारीरिक रूप से स्वस्थ है और अपने पिता के प्रति प्यार और कर्तव्य की भावना से, बिना किसी दबाव या लालच के अपनी मर्जी से लिवर दान करना चाहता है.

अस्पताल जल्द करेगा सर्जरी

हाई कोर्ट ने अनुच्छेद 226 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि अगर इस समय इजाजत नहीं दी गई, तो मरीज की जान जा सकती है. मानवीय आधार पर यह अनुमति देना बेहद जरूरी है. वहीं, ILBS अस्पताल ने कोर्ट को भरोसा दिया है कि वे आदेश का इंतजार कर रहे थे और अब बिना देरी किए जल्द ही सर्जरी की तारीख तय करेंगे.

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 226 क्या है?

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 226 (Article 226) हाई कोर्ट को दी गई एक बेहद शक्तिशाली और खास ताकत है. इसके तहत देश के किसी भी राज्य के हाई कोर्ट को यह अधिकार मिलता है कि वह नागरिकों के मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) की रक्षा के लिए और अन्य कानूनी अधिकारों को लागू करने के लिए आदेश या रिट जारी कर सके.

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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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