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Defense: चीन से लगती सीमा पर हालत स्थिर, लेकिन निगरानी की है जरूरत

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Defense: चीन से लगती सीमा पर हालत स्थिर, लेकिन निगरानी की है जरूरत

Defense: भारत-चीन सीमा पर वर्ष 2020 में दोनों सेना के बीच हुई झड़प के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए थे. दोनों देशों की ओर से सीमा पर बड़े पैमाने पर सैनिकों की तैनाती की गयी थी. हालांकि कई स्तर पर बातचीत के बाद तनाव में कमी आयी. चीन से लगती सीमा पर मौजूदा समय में हालात स्थिर है, लेकिन इसके लिए सतत निगरानी जरूरी है. मंगलवार को सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सेना की तैनाती संतुलित है. अक्टूबर 2024 में भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख के देपसांग में पेट्रोलिंग पर सहमति बनी. भारत और चीन के विशेष प्रतिनिधि के बीच दो दौर की बातचीत में सीमा विवाद हल करने पर चर्चा हो चुकी है. भारत की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन की ओर से विदेश मंत्री वांग यी वार्ता कर रहे हैं. 


सेना प्रमुख ने कहा कि पिछले साल मई में पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर हमला करने के लिए चलाया गया ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है. अगर पाकिस्तान की ओर से किसी तरह की हिमाकत करने की कोशिश होती है तो उसका कठोर जवाब दिया जायेगा. पाकिस्तान की ओर से परमाणु धमकी पर उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दोनों देशों के डीजीएमओ के बीच हुई बातचीत में इसपर कोई चर्चा नहीं हुई थी. 


सेना को आधुनिक बनाने पर है जोर

सेना प्रमुख ने कहा कि तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय के लिए थियेटर कमांड के गठन का काम चल रहा है. जल्द ही इस काम को पूरा कर लिया जाएगा. सेना को सशक्त और आधुनिक बनाने का काम लगातार किया जा रहा है. सेना दुश्मनों के ठिकानों को दूर तक हमला करने में सक्षम है. साथ ही सेना की कार्य क्षमता बढ़ाने के लिए भैरव लाइट कमांडो बटालियन बनायी है और मौजूदा समय में 13 भैरव बटालियन है. 

भैरव बटालियनों की भूमिका इन्फेंट्री बटालियनों के अंदर घातक प्लाटून और स्पेशल फोर्सेज के बीच के गैप को भरना है. यह आधुनिक उपकरणों से लैस हैं, जिसमें यूएएस उपकरण और काउंटर-यूएएस उपकरण, बड़ी मात्रा में गोला-बारूद और अन्य उपकरण शामिल हैं. आर्टिलरी के लिए एक दिव्यास्त्र बैटरी बनाई है. दिव्यास्त्र बैटरी आर्टिलरी रेजिमेंट का हिस्सा होगी और एक डिवीजन कमांडर को सपोर्ट देगी. इसमें यूएएस उपकरण, काउंटर-यूएएस (मानव रहित विमान प्रणाली) शामिल है. ड्रोन हमलों से निपटने के लिए अश्विनी प्लाटून बनाया गया है. ड्रोन के मामले में सेना विशेष काम कर रही है. मौजूदा समय में सेना के पास कई आधुनिक ड्रोन मौजूद हैं जो दूर तक हमला करने में सक्षम है.  

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