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Defense: भविष्य के युद्ध में एआई, साइबर सुरक्षा और तकनीक का होगा अहम रोल

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Defense: भविष्य के युद्ध में एआई, साइबर सुरक्षा और तकनीक का होगा अहम रोल

Defense: रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष से यह सबक मिला है कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना जरूरी है. समय के साथ रक्षा क्षेत्र को मजबूत और विस्तारित किया जाना चाहिए. सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (एसआईडीएम) के सातवें वार्षिक सत्र को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने यह बात कही. उन्होंने कहा कि सरकार अपने तीसरे कार्यकाल में एक मजबूत, नये और आत्मनिर्भर रक्षा तंत्र विकसित करने के लिए मौजूदा प्रयासों में नए सिरे से कदम उठाएगी. रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में रक्षा औद्योगिक गलियारों का निर्माण, स्वदेशी रक्षा उपकरणों का निर्माण, आयुध बोर्ड का आधुनिकीकरण, डीआरडीओ द्वारा निजी उद्योगों को सहायता प्रदान करना और रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 को शुरू किया गया है. स्वदेशी रक्षा उपकरण के लिए 5500 से अधिक उपकरणों की सूची तैयार की गयी है और अब इसका निर्माण देश में होगा. रक्षा क्षेत्र में निर्यात बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं. वित्त वर्ष 2023-24 में रक्षा निर्यात 21000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया. इसे और बढ़ाने के लिए निजी क्षेत्र भी कदम उठा रहे हैं.  


देश में रिकॉर्ड हुआ रक्षा उत्पादन


रक्षा मंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2023-24 में वार्षिक रक्षा उत्पादन 1.27 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया है. इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा उपक्रमों (डीपीएसयू) की हिस्सेदारी एक लाख करोड़ रुपये और निजी कंपनियों का योगदान लगभग 27000 करोड़ रुपये है. रक्षा क्षेत्र में निजी उद्योगों की हिस्सेदारी बढ़ने की बहुत संभावना है और हमारा लक्ष्य रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की भागीदारी को कम से कम 50 फीसदी करने का है. विदेशी कंपनियों और मूल उपकरण निर्माताओं (ओईएम) को भारत में निवेश करने या निजी उद्योग के साथ संयुक्त उद्यम खोलने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. 

भविष्य के युद्ध में तकनीक का होगा अहम रोल 

रक्षा क्षेत्र में लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) और स्टार्टअप की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), साइबर डिफेंस और स्वायत्त प्रणालियों जैसी अत्याधुनिक तकनीकों में अधिक निवेश करने की जरूरत है ताकि भारतीय सेना आधुनिक तकनीक से लैस हो सके. भविष्य में लड़े जाने वाले युद्धों में इन तकनीकों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी. कार्यक्रम के दौरान रक्षा निर्माण के क्षेत्र में उपलब्धि हासिल करने वालों को एसआईडीएम चैंपियन पुरस्कार भी दिया गया. इस दौरान चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, सचिव (रक्षा उत्पादन) संजीव कुमार, एसआईडीएम अध्यक्ष राजिंदर सिंह भाटिया और उद्योग जगत के दिग्गज कारोबारी मौजूद रहे.  

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