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Defense: सेना ने जैविक हमलों से निपटने के लिए किया अहम समझौता

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Defense: सेना ने जैविक हमलों से निपटने के लिए किया अहम समझौता

Defense: मौजूदा समय में परंपरागत युद्ध का दौर खत्म हो गया है और युद्ध के तरीके भी बदल गए हैं. युद्ध में हवाई ताकत के अलावा जैविक, रासायनिक हमलों का खतरा काफी बढ़ गया है. अधिकांश देश की सेना ऐसे हमलों से निपटने की तैयारी कर रही है. इस कड़ी में भारतीय सेना ने देश में निर्मित ऑटोमेटिक केमिकल एजेंट डिटेक्शन एंड अलार्म (एसीएडीए) खरीदने का फैसला लिया है. इसके लिए भारतीय सेना और एलएंडटी के बीच समझौता किया गया है. समझौते के तहत 223 एसीएडीए एलएंडटी सेना को मुहैया कराएगा और इसपर लगभग 80.43 करोड़ रुपये खर्च होंगे.

सेना को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह समझौता काफी अहम साबित होगा क्योंकि इसके निर्माण में प्रयोग होने वाले 80 फीसदी उपकरण स्वदेशी होंगे. स्वचालित रासायनिक एजेंट पहचान और चेतावनी (एसीएडीए) प्रणाली को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान, ग्वालियर ने डिजाइन और विकसित किया है. यह रासायनिक, जैविक, रेडियोधर्मी विकिरण वाले पदार्थों और न्यूक्लियर हमलों से सुरक्षा प्रदान करेगा. 

कैसे करेगा काम


स्वचालित रासायनिक एजेंट पहचान और चेतावनी (एसीएडीए) प्रणाली का उपयोग पर्यावरण से वायु का नमूना लेकर रासायनिक युद्ध के लिए उपयोग में लाए जाने वाले एजेंटों (सीडब्‍ल्‍यूए) और उसके लिए तैयार किए गए विषैले औद्योगिक रसायनों (टीआईसी) का पता लगाने में किया जाता है. यह आयन मोबिलिटी स्पेक्ट्रोमेट्री (आईएमएस) के सिद्धांत पर काम करता है और इसमें हानिकारक एवं विषैले पदार्थों का निरंतर पता लगाने तथा साथ ही साथ निगरानी के लिए दो अत्यधिक संवेदनशील आयन मोबिलिटी स्पेक्ट्रोमेट्री (आईएमएस) सेल होते हैं. फील्ड यूनिटों में स्वचालित रासायनिक एजेंट पहचान और चेतावनी (एसीएडीए) प्रणाली को शामिल करने से इस क्षेत्र में भारतीय सेना की रक्षात्मक क्षमता में काफी वृद्धि होगी. इस प्रणाली के निर्माण से औद्योगिक हादसे के दौरान आपदा प्रबंधन ऑपरेशन चलाने में भी मदद मिलेगी.

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