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Cyclone Tracker: यागी या बेबनिका तूफान, किसने मचाई ज्यादा तबाही, कैसे बनते हैं साइक्लोन

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Cyclone Tracker: यागी या बेबनिका तूफान, किसने मचाई ज्यादा तबाही, कैसे बनते हैं साइक्लोन

Cyclone Tracker: भारत समेत दुनिया के तटीय इलाकों में हमेशा तूफान की आशंका बनी रहती है. समुद्र में उठने वाले तूफान से राज्यों में अच्छी खासी तबाही मचती है. अलग-अलग जगहों में इन चक्रवाती तूफानों को अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है. कहीं पर उन्हें साइक्लोन कहा जाता है तो कहीं हरिकेन या टाइफून. हालांकि तीनों चक्रवाती तूफान के रूप हैं. उनके बीच का अंतर इस बात पर निर्भर करता है कि वो कहां बनते हैं. अटलांटिक और पूर्वी प्रशांत महासागर में उष्णकटिबंधीय चक्रवातों को आम तौर पर तूफान कहा जाता है. वहीं, पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में बनने वाले उष्णकटिबंधीय चक्रवात को टाइफून कहा जाता है. जबकि, हिंद महासागर और ऑस्ट्रेलिया के पास उष्णकटिबंधीय चक्रवातों को चक्रवात कहा जाता है. फिलहाल चीन, वियतनाम, फिलीपींस के आसपास मौसमी हलचल तेज है. यागी तूफान फिर इसके बाद बेबनिका की दस्तक से तबाही मची है.

यागी या बेबनिका तूफान में कौन है ज्यादा खतरनाक
यागी तूफान
बीते दिनों यागी तूफान ने दक्षिण चीन समेत कई और देशों में भयंकर तबाही मचाई थी. इसका असर भारत के तटीय राज्यों में भी दिखा. यागी तूफान के कारण हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए मजबूर होना पड़ा था. यागी एक तरह का टाइफून था जो चीन के समुद्र तट से टकराने के बाद भयंकर तबाही मचाता आगे बढ़ गया था. चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि सुपर टाइफून यागी ने भारी बारिश और तेज हवाओं के साथ दक्षिण चीन में तबाही मचाई. तूफान के कारण पेड़ उखड़ गए, बिजली गुल हो गई और सड़कें जलमग्न हो गईं. शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, 15 लाख से अधिक प्रभावित घरों में बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए 2,200 से ज्यादा कर्मचारियों को लगाना पड़ा. तूफान के कारण रेल सेवा और विमान सेवा भी प्रभावित हुई. आधिकारिक मीडिया के मुताबिक हैनान में 12 हजार से ज्यादा बेस स्टेशनों को तूफान से नुकसान पहुंचा था.

यागी तूफान के कारण प्रभावित क्षेत्रों से 10 लाख से अधिक लोगों को निकाला गया है. 100 से अधिक उड़ानों को रद्द कर दिया गया. तूफान इतना तेज था कि काफी संख्या में पेड़ उखड़ गये. वाहन पलटे हुए नजर आए. हैनान मौसम विज्ञान सेवा के मुताबिक यागी जिसके केंद्र बिंदु के पास लगभग 245 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चल रही थीं. साल 1949 से 2023 तक 106 टाइफून हैनान में आए, लेकिन केवल नौ टाइफून को ही सुपर टाइफून के रूप में श्रेणीबद्ध किया गया. इनमें से एक यागी भी था.

बीते 75 साल का सबसे ताकतवर तूफान बेबिनका
चीन में आस पास के देशों में यागी के बाद बेबनिका तूफान की दस्तक हुई. बेबिनका तूफान बीते 75 साल में शहर में आया सबसे ताकतवर तूफान है. इस तूफान के कारण जनजीवन ठप हो गया. शंघाई की केंद्रीय मौसम विज्ञान वेधशाला ने बताया कि तूफान 42 मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से चली. बेबनिका यह इस साल चीन में आया 13वां तूफान है. बेबिनका के कारण शंघाई में विमान सेवाएं रद्द कर दी गयी हैं. शंघाई रेलवे स्टेशन ने रविवार से सोमवार तक शहर से गुजरने वाले कई मार्गों पर यात्री ट्रेन निलंबित करने की घोषणा कर दी.
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक रविवार (15 सितंबर) तक 2.5 करोड़ की आबादी वाले इस विशाल शहर से 4 लाख से ज्यादा लोगों को अन्य स्थानों पर ले जाया गया.

बेबनिका के कारण उड़ानें रद्द, जमकर मची तबाही
बेबनिका तूफान के कारण रविवार को शंघाई के होंगकिआओ और पुडोंग हवाई अड्डों से प्रस्तावित सभी उड़ानें रद्द कर दी गईं. 600 से ज्यादा उड़ानें प्रभावित हुईं. पुलों और राजमार्गों पर यातायात आवाजाही पर भी प्रतिबंध लगा. 75 साल में आए इस सबसे बड़े तूफान से निपटने के लिए चीनी सरकार ने कई उपाय किए. उड़ानें रद्द की, राजमार्ग और रेल सेवाओं को बंद कर दिया गया.

क्या होता है साइक्लोन, कैसे होता है इनका निर्माण
साल 2024 में ही चीन अब तक 13 खतरनाक तूफानों को झेल चुका है. इसी तरह भारत समेत दुनियाभर के देशों के तटीय इलाके हमेशा चक्रवाती तूफानों से दो चार होते रहते हैं. समुद्र के ऊपर हवा होती है. नियम कहता है कि हवा हमेशा उच्च दाब से निम्न दाब वाले क्षेत्र की तरफ बहती है. नियम यह भी है कि जब हवा गर्म होती है तो हल्की होकर ऊपर उठने लगती है. ऐसे में जब समुद्र का पानी गर्म होता है, तो इसके ऊपर मौजूद हवा भी गर्म होकर ऊपर उठती है. इस कारण पूरे इलाके में एक निम्न दाब का क्षेत्र बन जाता है. ऐसे में यहां एक गैप बन जाता है. और आस पास की मौजूद ठंडी हवा इस निम्न दाब वाले क्षेत्र को भरने के लिए इसी ओर आने लगती है. वहीं धरती के अपने एक्सिस र घूमने के कारण यह ठंडी हवा चक्कर लगाती हुई निम्न दाब वाले क्षेत्र की ओर आती है. ऐसे में ही चक्रवात का निर्माण होता है.

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प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.
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