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Home National Cooperative: श्वेत क्रांति-2 के तहत देश के 80 फीसदी जिलों में दुग्ध संघ का होगा गठन 

Cooperative: श्वेत क्रांति-2 के तहत देश के 80 फीसदी जिलों में दुग्ध संघ का होगा गठन 

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Cooperative: श्वेत क्रांति-2 के तहत देश के 80 फीसदी जिलों में दुग्ध संघ का होगा गठन 
गृह मंत्री अमित शाह

Cooperative: देश ने दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है. अब देश श्वेत क्रांति-2 की तरफ बढ़ रहा है. ऐसे में सस्टेनेबिलिटी और सर्कुलेरिटी का महत्व काफी अधिक बढ़ गया है. श्वेत क्रांति-1 से देश ने जो भी हासिल किया है उससे सस्टेनेबिलिटी और सर्कुलेरिटी को पूरा करना अभी बाकी है. श्वेत क्रांति- 2 का मकसद इस लक्ष्य को हासिल करना है. ‘डेयरी क्षेत्र में सस्टेनेबिलिटी और सर्कुलेरिटी’ विषय पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने यह बात कही. उन्होंने कहा कि देश का डेयरी क्षेत्र ग्रामीण विकास, भूमिहीन और छोटे किसानों को समृद्ध बनाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है. पोषण की चिंता करता है, देश को दुनिया का नंबर एक दूध उत्पादक बनाने में योगदान देता है और कृषि के अलावा किसानों को अतिरिक्त आय भी प्रदान करता है. 


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर वाली अर्थव्यवस्था, दुनिया में तीसरे नंबर का अर्थतंत्र और 2047 में पूर्ण विकसित देश बनाने के तीन लक्ष्य रखे हैं और इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हर क्षेत्र में संभावनाओं का शत-प्रतिशत दोहन करने की पद्धति विकसित करनी होगी. डेयरी सेक्टर ने सर्कुलेरिटी के संबंध में गुड प्रैक्टिस को 250 दूध उत्पादक संघों तक पहुंचाने की शुरुआत की है. भारत की कृषि प्रणाली छोटे किसानों पर आधारित है और गांवों से शहर की ओर हो रहा पलायन छोटे किसानों की समृद्धि के साथ जुड़ा हुआ है. ग्रामीण पलायन की समस्या का समाधान करने के साथ छोटे किसानों को समृद्ध बनाने के लिए डेयरी एक महत्वपूर्ण विकल्प है.


देश के हर राज्य में दुग्ध संघ बनाना जरूरी


गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि मौजूदा समय में देश में 23 राज्य स्तरीय संघ हैं लेकिन श्वेत क्रांति- 2 के तहत हर राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश में एक राज्य स्तरीय संघ और देश के 80 फीसदी जिलों में दुग्ध संघ बनाने की दिशा में काम करना चाहिए. देश में फिलहाल 28 विपणन डेयरियों की संख्या बढ़ाकर 3 गुना किया जा सकता है. कोऑपरेटिव डेयरी क्षेत्र में उपभोक्ता के पास से आने वाले पैसे में से 75 फीसदी से अधिक किसानों को वापस मिलता है. कॉर्पोरेट सेक्टर में किसानों को 32 फीसदी पैसा वापस मिलता है. देश के हर किसान के लिए इस अंतर को कम करने का लक्ष्य रखना चाहिए और साथ ही 16 करोड़ टन गोबर को कोऑपरेटिव के दायरे में लाने का काम किया जाना चाहिए. 

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