[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home National केंद्र ने SC में कहा -सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी की समीक्षा ना करे कोर्ट

केंद्र ने SC में कहा -सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी की समीक्षा ना करे कोर्ट

0
केंद्र ने SC में कहा -सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी की समीक्षा ना करे कोर्ट
सबरीमाला मंदिर के भगवान अयप्पा

Sabarimala Temple : केंद्र सरकार ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगी पाबंदी के मसले पर सुप्रीम कोर्ट में कहा कि यह मसला धार्मिक आस्था से जुड़ा है, इसलिए यह मामला न्यायिक समीक्षा से बाहर का है. दरअसल सबरीमाला मंदिर में मासिक धर्म की आयु वाली महिलाओं के प्रवेश पर रोक है. यह उम्र सीमा 10 से 50 वर्ष के बीच की है.

हर चीज गरिमा या शारीरिक स्वतंत्रता से जुड़ी नहीं हो सकती

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र की ओर से उपस्थित भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने 9 सदस्यीय संविधान पीठ के सामने कहा कि यदि कोई प्रथा अवैज्ञानिक है, तो उसका समाधान संसद के पास है. प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली इस पीठ में जस्टिस बीवी नागरत्ना, जस्टिस एम एम सुंदरेश, जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, जस्टिस अरविंद कुमार, जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह, जस्टिस प्रसन्ना बी वराले, जस्टिस आर महादेवन और जस्टिस जॉयमाल्या बागची भी शामिल हैं. तुषार मेहता ने कोर्ट के सामने कहा कि हमें हर संप्रदाय की परंपरा का सम्मान करना होगा; हर चीज गरिमा या शारीरिक स्वतंत्रता से जुड़ी नहीं है. अगर मैं मजार या गुरुद्वारा जाता हूं, तो मुझे सिर ढंकना पड़ता है, तो मैं इस बात को अपनी गरिमा और अधिकार से जोड़कर नहीं देख सकता.

हर प्रथा पर रोक उचित नहीं

तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट के सामने यह कहा कि हम अदालत से यह स्पष्ट तौर पर कहना चाहते हैं कि वह इस तरह किसी भी प्रथा की समीक्षा ना करे, जिसके बारे में यह कहा जा रहा हो कि वह तर्कसंगत और वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है. यह एक तरह से संवैधानिक बदलाव है, जिसे संविधान में संशोधन के समान माना जाएगा.

2018 में कोर्ट ने महिलाओं के प्रवेश पर रोक को अवैध बताया था

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को अवैध बताते हुए सु्‌प्रीम कोर्ट ने 2018 में 4:1 के बहुमत से महिलाओं के प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया था और इसे अवैध और असंवैधानिक करार दिया था. बाद में 14 नवंबर 2019 को, चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने महिलाओं से भेदभाव के मुद्दे को 3:2 के बहुमत से बड़ी पीठ को भेज दिया था. इस फैसले में सबरीमाला मंदिर के अलावा मस्जिद, दरगाह और पारसियों के पवित्र स्थल में महिलाओं के प्रवेश से संबंधित मसलों पर विचार करने के लिए 9 सदस्यीय बेंच के पास मामला भेज दिया था.

ये भी पढ़ें : क्या LPG के बाद PNG संकट से रूबरू होगा भारत? कतर के दो जहाजों को ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पार करने से रोका

क्या पीएनजी है तेल संकट का समाधान, जानिए क्यों सरकार इसे कर रही है प्रमोट?

हार्दिक पांड्‌या की तबीयत पूछने होटल पहुंची गर्लफ्रेंड माहिका शर्मा, चेहरे पर थी चिंता

Previous article अवॉर्ड शो में मजाक पर राजपाल यादव ने तोड़ी चुप्पी, फैंस से की ये खास अपील
Next article पटना-खोरधा स्पेशल ट्रेन 9 अप्रैल से शुरू, झाझा में रुकेगी, जमुई को नजरअंदाज करने पर बढ़ी नाराजगी
Avatar Of Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel