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Cabinet Decision: केंद्रीय कैबिनेट ने जल जीवन मिशन के विस्तार को दी मंजूरी

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Cabinet Decision: केंद्रीय कैबिनेट ने जल जीवन मिशन के विस्तार को दी मंजूरी

Cabinet Decision: देश के ग्रामीण क्षेत्र में हर घर को नल से जल पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में जल जीवन मिशन के विस्तार को मंजूरी दी गयी. इस मिशन पर लगभग 8.7 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे. जल जीवन मिशन में केंद्र की हिस्सेदारी 3.59 लाख करोड़ रुपये होगी, जो वर्ष 2019-20 में 2.08 लाख करोड़ रुपये थी. अब जल जीवन मिशन में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 1.51 लाख करोड़ रुपये अधिक हो गयी है. 

जल जीवन मिशन के विस्तार का मकसद दिसंबर 2028 तक देश के सभी 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों तक नल से जल पहुंचाने का है. इस मिशन को और भी अधिक आधुनिक बनाने के लिए ‘सुजलम भारत’ नाम से एक नेशनल डिजिटल फ्रेमवर्क तैयार किया जाएगा. इसके तहत हर गांव को एक यूनिक ‘सुजल गांव आईडी’ मिलेगी. ताकि पानी के स्रोत से लेकर घर के नल तक पानी की पूरी सप्लाई चेन को डिजिटल मैप पर देखा जा सके. फैसले के तहत अब ग्राम पंचायतें ही जल जीवन मिशन के तहत काम पूरा होने का सर्टिफिकेट जारी करेगी और खुद ‘हर घर जल’ घोषित करने का काम करेगी.  इसके लिए हर साल ‘जल उत्सव’ जैसे कार्यक्रम आयोजित होंगे. कार्यक्रम का मकसद ग्रामीण समुदाय काे इस मिशन की स्वयं देखभाल के लिए तैयार करना है. 

गौर करने वाली बात है कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) जैसी संस्थाओं की ओर से जल जीवन मिशन को लेकर तैयार रिपोर्ट में कहा गया है कि इस मिशन से समाज में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं. रिपोर्ट के अनुसार लगभग 9 करोड़ महिलाओं को दूर से पानी ढोने की मजबूरी से मुक्ति मिली है और इसके कारण रोजाना लगभग 5.5 करोड़ घंटों की बचत हो रही है. यही नहीं जल जीवन मिशन के कारण डायरिया जैसी बीमारियों में कमी आई है और हर साल लगभग 4 लाख लोगों की जान बच रही है. इस मिशन से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के स्वास्थ्य में सुधार आने के साथ ग्रामीण इलाकों में रोजगार के करोड़ों नये अवसर पैदा हुए है. 

अन्य महत्वपूर्ण फैसले

 कैबिनेट ने रेलवे से जुड़े दो प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है और इसपर लगभग 4474 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. मंजूर रेलवे प्रोजेक्ट के तहत पश्चिम बंगाल के सैंथिया से झारखंड के पाकुड़ के बीच चौथी रेल लाइन के निर्माण को मंजूरी दी गयी है. इसके अलावा सांतरागाछी-खड़गपुर के बीच चौथी रेल लाइन के निर्माण को स्वीकृति मिली है. इन दोनों प्रोजेक्ट के निर्माण से रेलवे नेटवर्क में 192 किलोमीटर का इजाफा होगा. दो रेल प्रोजेक्ट के निर्माण से पश्चिम बंगाल और झारखंड के पांच जिलों को फायदा होगा और लगभग 5652 गांवों में कनेक्टविटी बेहतर होगी और इससे 1.47 करोड़ लोगों को फायदा होगा. सैंथिया-पाकुड़ चौथी रेल लाईन पर जहां 1569 करोड‍् रुपये का खर्च आयेगा, वहीं संतरागाछी-खड़गपुर रेल लाईन के निर्माण पर 2905 करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे. 

इससे न केवल कोयला, सीमेंट, पत्थर, डोलोमाइट, लौह अयस्क, स्टील, खाद्य उत्पादन और अन्य वस्तुओं की वस्तुओं की ढुलाई आसान होगी. एक अनुमान के अनुसार इस प्रोजेक्ट के निर्माण से सालाना 31 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई हो सकेगी. साथ ही बोलपुर-शांतिनिकेतन और तारापीठ जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंचना आसान होगा. इस प्रोजेक्ट के निर्माण से माल भाड़े की ढुलाई में कमी, सालाना 6 करोड़ लीटर पेट्रोल डीजल की खपत में कमी के साथ हर साल 28 करोड़ किलोग्राम कार्बन उत्सर्जन में कमी आने की संभावना है. 

केंद्रीय कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण, रेल एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि केंद्र ने लगभग 8.8 लाख करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है. इसके तहत मदुरै एयरपोर्ट को इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाने, रोड नेटवर्क को सुधारने के लिए बदनावर-थांदला-तिमरवानी (NH 752डी) को चार लेन बनाने और जेवर एयरपोर्ट को फरीदाबाद से जोड़ने वाली एलीवेटेड रोड बनाने को मंजूरी दी गयी है. 

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