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Bhojpuri: विश्व भोजपुरी सम्मेलन का आयोजन 12-13 अप्रैल को होगा

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Bhojpuri: विश्व भोजपुरी सम्मेलन का आयोजन 12-13 अप्रैल को होगा

Bhojpuri: भोजपुरी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग लंबे समय से हो रही है. इस मांग को लेकर पूर्वांचल एकता मंच वर्ष 2020 दादा देव मेला ग्राउंड में हर साल विश्व भोजपुरी सम्मेलन का आयोजन कर रहा है. एकता मंच का कहना है कि देश-विदेश में 20 करोड़ लोग भोजपुरी साहित्य और संस्कृति से जुड़े हुए है. लोगों की मांग के बावजूद इसे आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं किया जा रहा है. भोजपुरी भाषी लोगों की पुरानी मांग को सरकार को जल्द से जल्द स्वीकार करना चाहिए. इस बार विश्व भोजपुरी सम्मेलन का आयोजन 12-13 अप्रैल को होगा. इसमें भोजपुरी भाषा, साहित्य और संस्कृति से जुड़े देश-विदेश के विद्वान, साहित्यकार, कलाकार, भोजपुरी संगीत और सिनेमा से जुड़ी हस्तियां शामिल होगी.

कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली सरकार के कला एवं संस्कृति मंत्री कपिल मिश्रा, सांसद एवं भोजपुरी गायक मनोज तिवारी और अन्य गणमान्य लोग शामिल होंगे. इस सम्मेलन का मुख्य विषय है ‘भोजपुरी आठवीं अनुसूची में काहे ना’. इस विषय पर देश-विदेश के विद्वान अपनी बात रखेंगे. इस दौरान भोजपुरी कवि सम्मेलन, भोजपुरी नृत्य की विभिन्न विधाओं और भोजपुरी नाटक की प्रस्तुति होगी. 


पुरानी है मांग

पूर्वांचल एकता मंच का कहना है कि भोजपुरी अंतरराष्ट्रीय महत्व की एक अत्यंत मधुर भाषा है. भोजपुरी का साहित्य अत्यधिक समृद्ध है चाहे हो शिष्ट हो या फिर लोक साहित्य हो. भोजपुरी की पढ़ाई के कई विश्वविद्यालय हो रही है. बिहार, दिल्ली और मध्यप्रदेश में भोजपुरी अकादमी गठित है. भारत सरकार द्वारा गठित सीताकान्त महापात्र कमेटी ने भोजपुरी को संवैधानिक मान्यता देने की सिफारिश की थी. पिछली सरकार ने भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने पर विचार करने के लिए गृह मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव बीके प्रसाद की अध्यक्षता में एक हाई लेवल कमेटी बनाई थी.

इसमें गृह, संस्कृति, शिक्षा, कानून मंत्रालय के अधिकारी के अलावा साहित्य अकादमी, राजभाषा विभाग और केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान और रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया के सीनियर अधिकारी शामिल थे. गृह मंत्रालय को को सौंपी अपनी रिपोर्ट में इस कमेटी ने आठवीं अनुसूची में मौजूद 22 भाषाओं को शामिल करने की प्रक्रिया और मानदंडों को सही नहीं माना. कमेटी ने यह भी कहा कि इन भाषाओं को शामिल करने से हिंदी के विकास पर प्रभाव पड़ेगा. पूर्ववर्ती सरकारी और मौजूदा सरकार ने कई बार आश्वासन दिया, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ सकी है. विश्व भोजपुरी सम्मेलन के आयोजन देते पूर्वांचल एकता मंच के सांस्कृतिक सचिव नागेंद्र सिंह, उपाध्यक्ष एस एन सिंह,राष्ट्रीय संयोजक मुकेश सिंह, अध्यक्ष शिवजी सिंह, राष्ट्रीय महासचिव मनोज झा और राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ संतोष पटेल

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