[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home National Bhagwan Birsa Munda: के ‘जल, जंगल, जमीन’ के सिद्धांत केवल शब्द नहीं, जीवन शैली है

Bhagwan Birsa Munda: के ‘जल, जंगल, जमीन’ के सिद्धांत केवल शब्द नहीं, जीवन शैली है

0
Bhagwan Birsa Munda: के ‘जल, जंगल, जमीन’ के सिद्धांत केवल शब्द नहीं, जीवन शैली है
Birsa Munda

Bhagwan Birsa Munda:जनजातीय समुदाय हमारे देश का शौर्य हैं. जनजातीय संस्कृति और धरोहर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलना चाहिए. वह जहां भी जाते हैं जनजाति की शैली, उनकी संस्कृति, उनका म्यूजिक, उनकी जनजातीय विशेषताएं, उनकी प्रतिभा, खेल चाहे कुछ भी हो वह देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं. वनवासी कल्याण आश्रम विद्यालय, उदयपुर में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने यह बात कही. 

उप राष्ट्रपति ने भगवान बिरसा मुंडा के योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा, “भगवान बिरसा मुंडा जी ने देश की आज़ादी के लिए, जनजाति के लिए, मिट्टी के लिए जो किया वो अकल्पनीय है. वे वह व्यक्ति थे जिन्होंने हमें बताया, ‘जल, जंगल, जमीन’, शब्द नहीं हैं, ये जीवन शैली है.” उन्होंने बताया कि ये शिक्षाएं स्थायी जीवन और पर्यावरण के प्रति सम्मान का महत्व बताती हैं. आदिवासी समुदाय वह है जो अपनी जरूरत से एक कण भी ज्यादा नहीं लेता. आदिवासी लोग हमें सिखाते हैं कि पर्यावरण क्या है, स्वदेशी जीवन क्या है, परिवार का क्या मतलब है और एक व्यक्ति का कर्तव्य क्या है.

जनजातियों की आस्था को बदलने की हो रही है कोशिश

उपराष्ट्रपति ने सांस्कृतिक अखंडता पर मंडराने वाले खतरों के बारे में चेताते हुए कहा, “सुनियोजित तरीके से प्रलोभन देकर जनजातियों की आस्था को बदलने की कोशिश हो रही है. यह एक कुत्सित प्रयास है. चिकनी-चुपड़ी बातें करके, हमारा हितैषी बनकर, हमें लालच देकर, हमें लुभाकर, हमारी आस्था को बदलने की कोशिश हो रही है. हमारी सांस्कृतिक धरोहर हमारी नींव है. जब नींव हिल जाएगी तो कोई भी इमारत सुरक्षित नहीं है. सुनियोजित तरीके से, षड्यंत्रकारी तरीके से, प्रलोभन देकर आकर्षण करने की प्रक्रिया जो वह देख रहे हैं, उस पर अंकुश लगाने की आवश्यकता है. उप राष्ट्रपति ने कहा, “द्रौपदी मुर्मु का राष्ट्रपति पद पर आसीन होना जनजातीय गौरव का प्रतीक है.” उन्होंने इसे भारतीय लोकतंत्र की समावेशिता और विविधता का प्रतीक बताया.

भगवान बिरसा के कृत्य को आदर्श मानें

भारत के विकास पर चर्चा करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा, “अब भारत बदल गया है.आर्थिक दृष्टि से ऊंचा उठ रहा है. दुनिया में नाम हो रहा है, क्योंकि अमृत काल में हमने अमृत को पहचाना है”. प्रधानमंत्री की सोच के मुताबिक 15 नवम्बर को हर वर्ष बिरसा मुंडा जी की जन्म जयंती, राष्ट्रीय जनजातीय दिवस के रूप में मनाया जाता है. उन्होंने आवाहन किया कि सभी संकल्प लें, इन महापुरुष को समझें, इनके कृत्य को आदर्श माने और हमेशा राष्ट्रवाद को सर्वोपरि रखें.

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel