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Home National असम के कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने बीजेपी ज्वाइन किया, कहा–पार्टी में घुटन हो रही थी

असम के कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने बीजेपी ज्वाइन किया, कहा–पार्टी में घुटन हो रही थी

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असम के कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने बीजेपी ज्वाइन किया, कहा–पार्टी में घुटन हो रही थी
प्रद्युत बोरदोलोई

Pradyut Bordoloi joins BJP: असम चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा सदस्य प्रद्युत बोरदोलोई ने बीजेपी ज्वाइन कर लिया है. मंगलवार 17 मार्च को उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की उपस्थिति में बुधवार को बीजेपी की सदस्यता ले ली.

बीजेपी ज्वाइन करते ही कांग्रेस पर हमलावर हुए प्रद्युत बोरदोलोई


बीजेपी ज्वाइन करने के बाद प्रद्युत बोरदोलोई ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस पार्टी इसलिए छोड़ दी है क्योंकि उन्हें पार्टी में सम्मान नहीं मिल रहा था. उनकी बातों को कोई तरजीह नहीं दी जा रही थी और ना ही किसी तरह का कोई सपोर्ट ही उन्हें मिल रहा था. प्रद्युत बोरदोलोई ने कहा कि लंबे समय से घुटन और अपमान झेलने के बाद उन्होंने पार्टी से अलग होने का फैसला कर लिया.


प्रद्युत बोरदोलोई ने इमरान मसूद को बताया सांप्रदायिक


लोकसभा सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने कांग्रेस नेता इमरान मसूद पर निशाना साधते हुए उन्हें सांप्रदायिक नेता बताया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब अपने सिद्धांतों से भटक गई है और पार्टी में अब विभाजनकारी शक्तियां बढ़ गई हैं. बोरदोलोई के इस्तीफे से पार्टी का अंदरुनी कलह उजागर हो गया है, जिसका असर आगामी चुनाव में दिखेगा.


प्रद्युत बोरदोलोई का फैसला गलत: गौरव गोगोई


प्रद्युत बोरदोलोई के कांग्रेस छोड़ने पर असम कांग्रेस के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने कहा कि यह उनका बहुत ही गलत फैसला है. महज दो साल पहले पार्टी ने उन्हें नागांव से लोकसभा टिकट दिया था, वे चुनाव जीतकर सांसद बने हैं और अब वे बीजेपी के साथ जुड़ गए हैं. हमने उनके परिवार के एक सदस्य को विधानसभा चुनाव लड़ने का मौका दिया था, बावजूद इसके प्रद्युत बोरदोलोई ने यह फैसला किया, यह बहुत ही गलत है.


इमरान मसूद ने कहा–प्रद्युत का पर्सनल एजेंडा फेल हो गया

इमरान मसूद ने प्रद्युत बोरदोलोई के बीजेपी ज्वाइन करने पर कहा कि उनका पर्सनल एजेंडा फेल हो गया है. वे बीजेपी ज्वाइन करने का मन बना चुके थे. प्रियंका गांधी आयी थीं, तो उनसे भी मिली थी, लेकिन यहां सिर्फ पैसों का खेल चल रहा है. मुझे सांप्रदायिक कहकर प्रद्युत अपना असली चेहरा दिखा रहे हैं. असम कांग्रेस में ज्यादातर हिंदू हैं.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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