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Home Badi Khabar नोबेल पुरस्कार विजेता- प्रसिद्ध अर्थशास्त्री प्रो अमर्त्य सेन के निधन की अफवाह,बेटी नंदना देव सेन ने बताया सच

नोबेल पुरस्कार विजेता- प्रसिद्ध अर्थशास्त्री प्रो अमर्त्य सेन के निधन की अफवाह,बेटी नंदना देव सेन ने बताया सच

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नोबेल पुरस्कार विजेता- प्रसिद्ध अर्थशास्त्री प्रो अमर्त्य सेन के निधन की अफवाह,बेटी नंदना देव सेन ने बताया सच

नोबेल पुरस्कार विजेता और प्रसिद्ध अर्थशास्त्री प्रो अमर्त्य सेन के निधन कीसूचना इस वर्ष अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार पाने वाली अर्थशास्त्री क्लाउडिया गोल्डिन के फेक सोशल मीडिया के जरिए दी गई. यह एक फेक खबर थी जिसका उद्देश्य अफवाह फैलाना था. अर्थशास्त्री क्लाउडिया गोल्डिन के फेक आईडी से एक्स पर पोस्ट किया गया-एक दुखद खबर. मेरे सबसे प्रिय प्रोफेसर अमर्त्य सेन का कुछ मिनट पहले निधन हो गया है. मेरे पास कोई शब्द नहीं हैं… प्रो अमर्त्य सेन को 1998 में अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार मिला है. हालांकि उनकी बेटी नंदना देव सेन ने अपने पिता के निधन की खबर को गलत बताया, जिसके बाद यह खुलासा हुआ कि यह सूचना एक अफवाह थी.


https://twitter.com/profCGoldin/status/1711701739861057965

अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन का जन्म बंगाल के शांति निकेतन में 1933 में हुआ है. अमर्त्य सेन की नानी के संबंध गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के साथ बहुत अच्छे थे, इसलिए उन्होंने ही अमर्त्य सेन को यह नाम दिया था. उनकी प्रारंभिक शिक्षा संत जाॅर्ज स्कूल ढाका में हुई थी. उनके पिता आशुतोष सेन ढाका विश्वविद्यालय में केमेस्ट्री के प्रोफेसर थे. बंगाली परिवार में जन्मे अमर्त्य सेन का पूरा परिवार काफी शिक्षित और प्रगतिशील था. अमर्त्य सेन ने अपने करियर की शुरुआत जाधवपुर यूनिवर्सिटी से की थी. वे वहां इकोनाॅमिक्स के प्रोफेसर थे. सेन ने गरीबी मापने के तरीके तैयार किए जिससे गरीबों की आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए उपयोगी जानकारी मिली. उन्हें भारत सरकार ने सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से भी सम्मानित किया है.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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