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Home National अगर जरूरत पड़ी, तो और सर्जिकल स्ट्राइक कर सकता है भारत : थल सेनाध्यक्ष

अगर जरूरत पड़ी, तो और सर्जिकल स्ट्राइक कर सकता है भारत : थल सेनाध्यक्ष

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अगर जरूरत पड़ी, तो और सर्जिकल स्ट्राइक कर सकता है भारत : थल सेनाध्यक्ष

नयी दिल्ली : नोटबंदी के ठीक पहले घाटी में नियंत्रण रेखा पार भारतीय सैनिकों की ओर से किये गये सर्जिकल स्ट्राइक के बाद नवनियुक्त थल सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत ने कहा है कि जरूरत पड़ने भारत की ओर से और भी सर्जिकल स्ट्राइक किया जा सकता है, क्योंकि भारत के पास नियंत्रण रेखा के उस पार बने आतंकी अड्डों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार है. उन्होंने कहा है कि अगर सीमा पार से आतंकवादी नियंत्रण रेखा पर भारत के हालात को बिगाड़ने का प्रयास जारी रखते हैं, तो सेना फिर सर्जिकल स्ट्राइक करने में नहीं हिचकिचायेगी.

जनरल बिपिन रावत ने पिछले हफ्ते ही 27वें थल सेनाध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला है. कार्यभार संभालने के बाद समाचार चैनल एनडीटीवी को दिये साक्षात्कार में कहा है कि सितंबर, 2016 में किये गये सर्जिकल स्ट्राइक एक खास संदेश देने के उद्देश्य से किये गये थे. उन्होंने कहा कि अगर सीमा पार और भी आतंकी अड्डे हैं और वे नियंत्रण रेखा पर हमारी ओर के हालात को बिगाड़ना जारी रखते हैं, तो हमारे पास आतंकवादियो के खिलाफ कार्रवाई करने का हक है, जिन्हें सीमापार से हमारे दुश्मन से समर्थन मिल रहा है.

जनरल रावत के मुताबिक, 29 सितंबर को किये गये सर्जिकल स्ट्राइक अच्छी योजना बनाकर किये गये थे. जनरल रावत उस वक्त वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ थे. उन्होंने खुद सभी ऑपरेशनों पर नजर बनाये रखी थी. उन्होंने बताया कि सितंबर के सर्जिकल स्ट्राइक के लिए काफी तैयारियां की गयी थीं और तब उसे अंजाम दिया गया था. उन्होंने यह भी बताया कि ऑपरेशन पर रीयल टाइम निगरानी की गयी थी, ताकि सेना की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. जनरल बिपिन रावत ने कहा कि इसका श्रेय इन ऑपरेशनों की अच्छी योजना बनाने वाले मेरे पूर्ववर्ती को, नॉर्दर्न आर्मी कमांडर तथा जमीनी फौजियों को जाता है.

सेना प्रमुख की नियुक्ति पर इस बार विवाद भी खूब हुआ. कांग्रेस, वाम मोर्चा समेत अन्य विपक्षी दलों के साथ-साथ रक्षा प्रतिष्ठान के एक वर्ग ने भी सेना प्रमुख की नियुक्ति को लेकर सवाल उठाये. विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि सेना की नियुक्तियों का राजनीतिकरण किया जा रहा है. इस पर जनरल बिपिन रावत कहना है कि सरकार का फैसला व्यक्तियों से प्रभावित नहीं हो सकता. अगर यह सब इतना आसान होता, तो हर कोई सरकार के पीछे अपनी पसंदीदा पोस्ट के लिए भाग रहा होता. पूर्वी कमान प्रमुख लेफ्टिनेट जनरल प्रवीन बख्शी और दक्षिणी कमान प्रमुख पीएम हरीज़ की वरिष्ठता के बारे में पूछे जाने पर जनरल रावत कहते हैं कि हमने कई बार साथ-साथ खाना खाया है, हम एक साथ बड़े हुए हैं और मैं समझता हूं कि हम एक-दूसरे को बेहतर ढंग से जानते हैं.

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