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जानिये शशिकला के सामने क्या होगी चुनौतियां ?

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जानिये शशिकला के सामने क्या होगी चुनौतियां ?

‘अम्मा’ जे जयललिता के निधन के बाद तमिलनाडु की राजनीति में एक शून्य उभर आया था. उनके बाद कौन? लेकिन अब धुंधली तस्वीर साफ होने लगी है. ऐसे में लोग शशिकला नटराजन की ओर उम्मीद से देख रहे हैं. यह भी कहा जा रहा है कि भले ही पनीरसेल्वम मुख्यमंत्री हों, लेकिन पार्टी की कमान शशिकला के हाथों में होगी और सरकार के तमाम फैसले परदे के पीछे से वहीं लेंगी. उन्हें पार्टी महासचिव बनाने की चर्चा आम है. शशिकला को पार्टी की कमान सौंपने के पीछे उनका और जयललिता का 30 साल का संबंध है. शशिकला नटराजन पिछले 30 सालों से जयललिता के सबसे करीब रहीं हैं.

शशिकला के पास नहीं है जयललिता सा आभामंडल
शशिकला भले ही जयललिता की काफी करीब रही हों, लेकिन उनके पास वह आभामंडल नहीं है, जो जयललिता के पास था. तमिलनाडु की राजनीति में सिने जगत के लोगों का दबदबा रहा है और यह गुण भी शशिकला के पास नहीं है. हालांकि शशिकला ने जयललिता के अंतिम संस्कार की सारी प्रक्रिया पूरी की और उनसे अपनी करीबी को बखूबी दर्शाया, लेकिन पार्टी और अम्मा के समर्थक इससे कितने संतुष्ट हैं यह अभी स्पष्ट नहीं कहा जा सकता. शशिकला के सामने एक और चुनौती यह है कि भले ही वह पार्टी में रहीं हों, लेकिन उनकी पहचान एक राजनेता के रूप में नहीं बन पायी है. शशिकला भ्रष्टाचार के आरोप में जेल भी गयीं हैं, जो उनकी छवि को दागदार करता है.
शशिकला पर जयललिता को जहर देने का भी लगा है आरोप
शशिकला भले ही जयललिता की करीबी और राजदार रहीं हो, लेकिन दोनों के संबंध बनते-बिगड़ते रहे हैं. एक बार तो शशिकला पर यह आरोप भी लगा था कि उन्होंने जयललिता को जहर देकर मारने की कोशिश की थी. वर्ष 2011 में जयललिता ने शशिकला को पार्टी से बाहर कर दिया था, हालांकि बाद में उनकी वापसी हो गयी थी. जब जयललिता अस्पताल में थीं, तो शशिकला ने उनकी एकमात्र भतीजी को अस्पताल में उनसे मिलने नहीं दिया, हालांकि उन्हें अंतिम दर्शन का अवसर मिला. यह बात भी शशिकला के विरोध में जा सकती है.
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