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जानें, जिगिषा घोष मर्डर केस में टैटू कैसे बना अहम सुराग

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जानें, जिगिषा घोष मर्डर केस में टैटू कैसे बना अहम सुराग

नयी दिल्ली : साउथ दिल्ली के बहुचर्चित आइटी एग्जिक्यूटिव जिगिषा घोष हत्याकांड मामले में सात साल बाद कोर्ट का फैसला आ गया. कोर्ट ने इस मामले में तीन अभियुक्तों रवि कपूर, अमित शुक्ला और बलजीत सिंह मलिक को हत्या, अपहरण लूट, जालसाजी और सामान्य मकसद के तहत दोषी ठहराया है.

वहीं अभियुक्त रवि को आर्म्स एक्ट के अतिरिक्त आरोप के तहत भी दोषी पाया गया है.मालूमहो कि एक मैनेजमेंट कंसलटेंसी फर्म में ऑपरेशन मैनेजर जिगिषा घोष 18 मार्च 2009 की रात ऑफिस की कैब से वंसत विहार स्थित अपने घर लौट रही थी, लेकिन घर नहीं पहुंची और दो दिन बाद उसका शव मिला. अभियुक्तों की सजा पर अदालत 20 अगस्त को अभियोजन व बचाव पक्ष की जिरह सुनेगी. जिगिषा घोष मर्डर केस में तीनों आराेपियों रवि कपूर, बलजीत मलिक और अमित शुक्लाके खिलाफ पत्रकार सौम्याविश्वनाथनका मर्डर केस अभी जारी है.

जांच को अंजामतक पहुंचानेमेंतीनशख्सियतों का रहा अहमयोगदान

तत्कालीनडीसीपीसाउथ हरगोविंद धालीवाल,केस के जांच अधिकारी इंस्पेक्टर अतुल वर्मा और स्पेशल पब्लिक प्रोसिक्यूटरराजीव मोहन ने जिगिषा हत्याकांड को सुलझानेमें अहम योगदानदिया. इनकेअलावाउनगवाहों ने भी अहमभूमिकारही, जिन्होंने कोर्ट मेंआरोपियों की शिनाख्तकी. मार्च 2009 में धालीवाल डीसीपी साउथ थे. ओखला इंडस्ट्रियल एरिया थाने के मौजूदा एसएचओ अतुल वर्मा तब इस थाने में इंस्पेक्टर इंवेस्टिगेशन थे.

जिगिषा के पिता ने दर्ज करायी थी गुमशुदगी की रिपोर्ट
19 मार्च को जिगिषा घोष के पिता जगन्नाथ घोष ने वसंत विहार थाने में अपनी बेटी की गुमशुदगी दर्ज करायी थी. उसके मोबाइल फोन की लोकशन और एटीएम कोर्डों की डिटेल निकाली गयी तो साफ हो गया कि लड़की के साथ कोई हादसा हुआ है. 20 मार्च की शाम सूरजकुंड में जिगिषाकीडेडबॉडी बरामद हुई.

आरोपी के हाथ पर गुदा लंबा टैटू बना अहम सुराग
धालीवाल और अतुल वर्मा रात-दिन इसमामलेकी जांच में जुट गये. बैंक से कार्ड की डिटेल लेकर महिपालपुर स्थित एटीएम बूथ से सीसीटीवी फुटेज निकाली गयी. उसमें जिगिषा के साथ खड़े एक आरोपी के हाथ पर लंबा टैटू गुदा देखा गया. उसकी फोटो कई थानों के पुलिसवालों में बंटवादीगयीऔर तलाश की हिदायत दी. इसी बीच वसंत कुंज थानेमें तैनात पुलिस अधिकारीको एक लड़के ने बताया कि वह फोटो बलजीत मलिक की है. यह इस केस में बड़ी कामयाबी थी. 22 मार्च को बलजीत को पकड़ लिया गया. उसके हाथ पर उसके नाम का आठ इंच लंबा टैटू बना था. उसके बाद रवि कपूर और अमित शुक्ला को गिरफ्तार किया गया.

आरोपियों की कोर्ट में हुई पहचान
– महिपालपुर स्थित एटीएम बूथ पर तैनात गार्ड भीमाराव ने आरोपियों को कोर्ट में पहचान लिया. उसने सैंट्रों कार की भी शिनाख्त की.
– रवि कपूर और जिगिषा का अपहरण करते हुए 13 साल के अभिषेक ने अपने घर की खिड़की से देखा था. यह देख कर उसे कई दिन बुखार भी रहा था. उसने कोर्ट में आरोपियाें को पहचाना.
– सरोजनी नगर मार्केट में जिगिषा के कार्ड से शॉपिंग के वक्त शोरूम के कर्मचारी ने आरोपियों की पहचान कोर्ट में की.
– जिगिषा के सहयोगी समेत तीन सहकर्मियों ने कोर्ट को बताया कि आरोपियों से बरामद रिंग और गोल्ड चेन जिगिषा की थी.
– जिगिषा के पिता जगन्नाथ घोष ने भी कोर्ट को बताया कि ज्वेलरी उनकी बेटी की है. रवि को यह चेन पहले हुए गिरफ्तार किया गया था और रिंग अमित के घर से मिली थी.

तमाम गवाहों और सबूतों के आधार पर कोर्ट ने तीनों मुलजिमों को मुजरिम करार दिया. साथ ही कोर्ट ने यह निर्देश भी दिया किपुलिसअधिकारी आरोपियों के परिवार वालों से मिल कर उनकी माली हालत के बारे में रिपोर्ट करें. जिससे कि जिगिषा के अभिभावकों को मिलने वाले मुआवजे की रकम तय की जा सके.

20 अगस्त हो होगी बहस
साकेत कोर्ट ने आदेश दिया है कि जिगिषा घोष मर्डर केस में प्रोबेशनरी अफसर नियुक्त किया जायेगा. उनकी रिपोर्ट चार हफ्ते में मिलने के बाद ही तीनों हत्यारों की सजा पर 20 अगस्त को बहस होगी. कोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार इस केस में प्रोबेशनरी अफसर नियुक्त करेगी. वह अफसर जेल में जाकर इन तीनों आरोपितों के सामाजिक व्यवहार के बारे में छानबीन करेगा. उन्हें चार हफ्ते में अपनी रिपोर्ट कोर्ट में दायर करनी होगी. जिगिषा मर्डर केस में उम्र कैद या फांसी में कोई एक सजा सुनाई जायेगी.

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