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Home National ”असम फतह” के बाद आराम के मूड में नहीं हैं नरेंद्र मोदी

”असम फतह” के बाद आराम के मूड में नहीं हैं नरेंद्र मोदी

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”असम फतह” के बाद आराम के मूड में नहीं हैं नरेंद्र मोदी

नयी दिल्ली : गुरुवार को ही भाजपा ने असम विधानसभा चुनाव में जबरदस्त जीत दर्ज की है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसके बावजूद बिल्कुल भी आराम के मूड में नजर नहीं आ रहे हैं. 26 मई को उनकी सरकार को दो साल पूरे होने जा रहे हैं और पीएम मोदी ने पार्टी के कायापलट या यूं कहें पार्टी में उलटफेर के लिए विचार-विमर्श करने का फैसला लिया है. खबर है कि इस जांच और मरम्मत कार्य में उनके निशाने पर उनके मंत्रिमंडल से लेकर भाजपा संगठन और राज्यों के राज्यपाल तक शामिल हैं. प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और वित्त मंत्री अरुण जेटली के साथ दो घंटे से ज्यादा देर तक बैठक की.

इस बैठक में पार्टी में फेरबदल और भाजपा की नीति निर्धारक इकाइयों में बदलाव को लेकर चल रहे कयासों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और वित्त मंत्री अरुण जेटली से विचार-विमर्श किया. पार्टी के शीर्ष नेताओं के बीच क्या बातचीत हुई, इसको लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि इस बैठक का संबंध पार्टी और सरकार में बदलावों से हो सकता है.

भाजपा के एक पदाधिकारी ने कहा कि राजनीतिक हालात पर शीर्ष नेता समय समय पर मिलते रहते हैं. कैबिनेट में फेरबदल के बारे में पूछे जाने पर शाह ने कहा कि इस बारे में फैसला नहीं हुआ है. शाह के इस साल की शुरुआत में दूसरी बार अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में बदलाव अभी नहीं हुए हैं.

असम के बाद भाजपा के लिए अगली बड़ी परीक्षा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव हैं. साल 2014 के आम चुनाव में पार्टी ने इस राज्य की 80 में से 73 लोकसभा सीटें जीती थीं. अगर 2017 विधानसभा चुनाव में पार्टी यहां अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाती है तो इसका असर अगले लोकसभा चुनाव पर पड़ेगा. पार्टी को 2019 में फिर से 2014 की जीत दोहराने में मुश्किल पेश आ सकती है. पार्टी और सरकार के इस मरम्मत कार्य को भाजपा के वैचारिक संरक्षक आरएसएस द्वारा धार दी जाएगी. असल में आरएसएस तो पूरी तरह से आश्वस्त है कि असम में उनकी रणनीति ने काम किया और उत्तर प्रदेश में भी उनकी बड़ी भूमिका धरातल पर नजर आएगी.

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