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Home National बोले श्री श्री, भारत की प्रतिष्ठा से जुड़े कार्यक्रम का राजनीतिकरण नहीं किया जाए

बोले श्री श्री, भारत की प्रतिष्ठा से जुड़े कार्यक्रम का राजनीतिकरण नहीं किया जाए

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बोले श्री श्री, भारत की प्रतिष्ठा से जुड़े कार्यक्रम का राजनीतिकरण नहीं किया जाए

नयी दिल्ली : आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने आज कहा कि पार्टियों को उन कार्यक्रमों का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए जिसका असर भारत की प्रतिष्ठा पर पड़े और संकेत दिया कि यमुना खादर में विश्व सांस्कृतिक महोत्सव की आलोचना करने में मीडिया कठोर रहा है. उन्होंने दावा किया कि उनके फाउन्डेशन को पहले ही ऑस्ट्रेलिया, मेक्सिको और अन्य देशों से कार्यक्रम का अगला संस्करण आयोजित करने का न्योता मिल चुका है.

आध्यात्मिक गुर ने कहा, ‘‘हमें थोड़ी परिपक्वता की आवश्यकता है. मैं इसकी परवाह नहीं करता लेकिन मैं सभी राजनैतिक दलों से अनुरोध करता हूं. जब भी इतना भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा हो तो दलगत राजनीति को दरकिनार रखना चाहिए.” श्री श्री ने कहा, ‘‘आपको साथ आना चाहिए ताकि विश्व मंच पर भारत की प्रतिष्ठा बढ़े.

इस स्तर का कार्यक्रम आयोजित करना इतना आसान नहीं है—यह एक बड़ी बात है—इसलिए दुनियाभर के लोग जुड़ा हुआ महसूस कर सकें.” उन्होंने कहा, ‘‘दुनियाभर के लोग आश्चर्यचकित हैं. हमें ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री से पत्र मिला जिसमें उन्होंने हमसे वहां कार्यक्रम आयोजित करने को कहा. वे हमें सभी तरह की सहायता देने को तैयार हैं. मेक्सिको से—देश इस कार्यक्रम की मेजबानी करने को उत्सुक हैं. साथ ही, अंतरराष्ट्रीय मीडिया पूछ रहा है कि भारतीय प्रेस इस उत्सव को लेकर इतना कठोर क्यों है. मैंने मुस्कुरा कर कहा कि मैं नहीं जानता.”

यमुना खादर में महोत्सव के आयोजन का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि वे नदी में नयी जान फूंकने के लिए काम करेंगे. राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा लगाए गए पांच करोड़ रुपये के जुर्माने का भुगतान नहीं करने के बारे में उनके बयान से जुड़े सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि एनजीटी ने साफ कर दिया है कि यह जुर्माना नहीं था बल्कि उस इलाके को नया जीवन प्रदान करने के लिए मुआवजा है.

एओएल संस्थापक ने कहा कि उनका संगठन यमुना नदी के संरक्षण के लिए ठोस योजना के साथ आएगा. उन्होंने कहा, ‘‘हमने कार्यक्रम से पहले कुछ पर्यावरणविदों से सलाह-मशविरा किया था जिसमें उन्होंने कहा कि खादर क्षेत्र को इस कार्यक्रम के आयोजन से क्षति नहीं होगी.

साथ ही हम कुछ पर्यावरणविदों से सलाह-मशविरा करेंगे और यमुना के लिए ठोस कार्ययोजना के साथ उसे नया जीवन प्रदान करने पर काम करेंगे.” रविशंकर ने कहा कि उन्होंने शुरुआत में कार्यक्रम को एक स्टेडियम में आयोजित करने के बारे में सोचा था लेकिन कार्यक्रम की विशालता के मद्देनजर उस विचार को छोड़ दिया गया.

तीन दिवसीय विश्व सांस्कृतिक महोत्सव के समापन पर आज उन्होंने कहा, ‘‘कोई भी स्टेडियम इतने सारे कलाकारों और लोगों को समाहित करने में सक्षम नहीं होता.” उन्होंने कहा कि 172 से अधिक गणमान्य लोग पूरी दुनिया से कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए आए. इसकी आलोचना हुई और इन आरोपों को लेकर मुकदमेबाजी हुई कि यमुना खादर की पारिस्थितिकी को क्षति पहुंचेगी. कार्यक्रम की तैयारी में सेना के कर्मियों को तैनात किए जाने और इतने बडे कार्यक्रम के कारण यातायात में हुई समस्या से जुडे सवाल भी पूछे गए.

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