नयी दिल्ली : संस्कृति को भारत की सच्ची ताकत बताते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने आज कहा कि सभी धर्म हमें सचाई और अहिंसा का मार्ग अपनाने की शिक्षा देते हैं. सरसंघचालक ने कहा कि भारत, दुनिया को राह दिखा सकता है और संतों की प्राचीन शिक्षा को सबसे पहले घर में अनुसरण करना चाहिए और फिर इसका बाहर प्रसार करना चाहिए. जैन धर्म से जुडे एक समारोह में भागवत ने कहा, ‘‘ गलत इरादे वाले दुष्ट लोग हर कालखंड में रहे हैं. वे समाप्त नहीं होंगे. इसी तरह से अच्छे लोग भी हर कालखंड में मौजूद रहे हैं. किसी को भी अच्छा काम करने से भयभीत नहीं होना चाहिए और समस्याओं का समाधान भयमुक्त होकर ढूंढना चाहिए. ” उन्होंने कहा, ‘‘ भयमुक्त होने के लिए केवल शरीरिक ताकत ही जरुरी नहीं है बल्कि विनम्रता ही ताकत है.
भारत की सच्ची ताकत उसकी विनम्रता है. हमारे देश में सभी धर्म हमें सचाई और अहिंसा का मार्ग अपनाने का संदेश देते हैं.” सरसंघचालक ने कहा कि देश को सही अर्थो में महान बनाने के लिए भारत के युवा को इसी के अनुरुप विकसित होने की जरुरत है. उन्होंने कहा, ‘‘ भारत, दुनिया को राह दिखा सकता है. हमें अपने देश के युवाओं का विकास करना होगा ताकि भारत सही अर्थो में महान बन सके. युवाओं को नैतिक शिक्षा प्रदान करने की जरुरत है.” भागवत ने कहा, ‘‘ इसके लिए प्राचीन साधु संतों की शिक्षा को पहले अपने जीवन में आत्मसात करने की जरुरत है. इसके बाद उसे अपने घर में तथा फिर बाहर प्रसार करना चाहिए.’