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किसान आत्महत्या को लेकर छत्तीसगढ़ में सरकार और विपक्ष आमने सामने

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किसान आत्महत्या को लेकर छत्तीसगढ़ में सरकार और विपक्ष आमने सामने

रायपुर : सूखा का सामना कर रहे छत्तीसगढ़ में किसानों की आत्महत्या को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. कांग्रेस के मुताबिक राज्य सरकार की गलत नीतियों के कारण किसान आत्महत्या कर रहे हैं, वहीं सरकार का कहना है कि किसानों ने खेती की समस्या के कारण आत्महत्या नहीं की है.

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के खपरी गांव के किसान राधेश्याम साहू ने 27 नवंबर को जहर खाकर जान दे दी थी. राधेश्याम ने अपने खेत में धान बोया था. राज्य के राजनांदगांव जिले में भी एक किसान के आत्महत्या की खबर है. इसके अलावा राज्य के अन्य जिलों से भी किसानों के आत्महत्या की खबरें आ चुकी है. धमतरी और राजनांदगांव जिले में जब किसानों के आत्महत्या की खबर आई तब राज्य के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इसके लिए राज्य सरकार को दोषी ठहराया और कहा कि किसानों ने कर्ज के बोझ तले दबकर आत्महत्या की है.
किसान की आत्महत्या की जानकारी मिलने के बाद धमतरी जिला प्रशासन ने जांच दल खपरी गांव भेजा था. जांच दल ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि राधेश्याम ने कोई भी कर्ज नहीं लिया था और उसकी फसल भी अच्छी थी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि राधेश्याम अक्सर शराब पीता था और इसकी वजह से घर में विवाद होता था. पुलिस राधेश्याम के आत्महत्या करने के कारणों के बारे में छानबीन कर रही है.
छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है और यहां के ज्यादातर किसान खरीफ मौसम में धान उगाते हैं. लेकिन इस वर्ष मानसून यहां रुठ गया और इसका खामियाजा किसानों का भुगतना पडा. मौसम विभाग के वैज्ञानिकों के मुताबिक राज्य में लगभग औसत बारिश हुई है. लेकिन कुछ जिलों में कम बारिश के कारण सूखे की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है.
रायपुर स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक एमएल साहू के मुताबिक राज्य में इस वर्ष औसत से 15 फीसदी कम बारिश हुई है. 15 फीसदी कम बारिश को औसत की ही श्रेणी में रखा जाता है लेकिन राज्य के कुछ हिस्सों में मानसून की बेरुखी के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पडा है.
राज्य सरकार ने किसानों की पेरशानी को देखते हुए 26 जिलों की 117 तहसीलों को सूखा प्रभावित घोषित कर दिया है. इन तहसीलों में किसानों को मुआवजा दिया जाएगा और इसके साथ ही कई अन्य राहत भी देने का फैसला राज्य सरकार ने किया है. इनमें सूखा प्रभवित किसानों को कुल नौ हजार यूनिट बिजली नि:शुल्क देने और अगले साल खरीफ फसल के दौरान बोने के लिए एक क्विंटल तक धान नि:शुल्क देने का निर्णय शामिल है. हालांकि कांग्रेस सूखे की समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार के इन प्रयासों को कम मानती है.
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री शैलेष नितिन त्रिवेदी कहते हैं कि राज्य में अब तक 15 से अधिक किसानों के आत्महत्या की जानकारी प्रदेश कांग्रेस को मिली है. यह राज्य सरकार की असंवेदनशीलता का ही परिणाम है कि किसान यहां लगातार आत्महत्या कर रहे हैं. त्रिवेदी के अनुसार राज्य में किसानों की आत्महत्या की घटनाओं के बाद कांग्रेस ने जांच दल बनाया था.
जांच के दौरान जानकारी मिली है किसानों ने कर्ज लेकर खेती की है और फसल के खराब होने के बाद आत्महत्या कर ली है. कांग्रेस नेता कहते हैं कि पार्टी ने पूरे राज्य को सूखाग्रस्त घोषित करने, रबी फसल के लिए तत्काल ऋण उपलब्ध कराने, 21 सौ रुपए समर्थन मूल्य पर धान खरीदे जाने और आत्महत्या करने वाले किसानों के परिजनों को मुआवजा देने जैसी मांगे सरकार से की है.
इधर राज्य सरकार ने कर्ज या सूखे के कारण किसानों द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटना को नकार दिया है. राज्य के कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल कहते हैं कि राज्य में जितने भी आत्महत्या हुई हैं वह दुखद हैं. लेकिन यह कहना कि सूखे और कर्ज के कारण किसान आत्महत्या कर रहे हैं यह उचित नहीं है. अग्रवाल का कहना है कि किसानों के आत्महत्या की खबरों पर राज्य शासन ने जांच करवाई है. जांच में पाया गया है कि किसानों ने अन्य कारणों से आत्महत्या की है.
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