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बाल तस्करी रोकने के लिए व्यापक कानून की तैयारी

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बाल तस्करी रोकने के लिए व्यापक कानून की तैयारी

नयी दिल्ली : सरकार बच्चों की तस्करी को रोकने के लिए एक समग्र कानून बनाने की दिशा में काम कर रही है क्योंकि मौजूदा कानून ‘ठोस नहीं हैं’ और वे ‘अपर्याप्त’ साबित हो रहे हैं. महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि तस्करी न केवल यौन उत्पीडन के लिए होती है बल्कि जबरन मजदूरी और मानव अंगों के कारोबार के लिए भी उनकी तस्करी की जाती है.

उन्‍होंने आगे कहा,’ अनैतिक तस्करी (रोकथाम) और यौन शोषण के खिलाफ बच्चों का संरक्षण (पोक्सो) समेत अन्य मौजूदा कानून ऐसे मामलों में अपर्याप्त हैं. अधिकारी ने बताया, ‘मौजूदा कानूनों में अपराध की व्याख्या की समस्याएं हैं. जैसे कि जबरन मजदूरी के लिए बच्चों की तस्करी से निपटने वाले कानून में कोई प्रभावी प्रावधान नहीं हैं और कुछ कानूनों में तो यौन शोषण की उचित तरीके से व्याख्या तक नहीं की गयी है.’

संबंधित मंत्रालयों, राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों और कुछ एनजीओ के सदस्यों के साथ सचिव की अध्यक्षता में हुई मंत्रालय की स्थायी समिति की बैठक में इसी के मद्देनजर सभी प्रकार की तस्करी से निपटने के लिए समग्र कानून बनाने का फैसला किया गया. अधिकारी ने बताया, ‘हम सभी के बीच यह आम सहमति बनी कि सभी प्रकार की तस्करी से निपटने के लिए एक अलग कानून होना चाहिए क्योंकि मौजूदा कानूनी प्रावधान चार पांच कानूनों में फैले हुए हैं और इनमें कोई एक केंद्रित सोच नहीं है.’

कानून को अंतिम रुप देने के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय हालांकि नोडल एजेंसी है लेकिन गृह मंत्रालय इस मुद्दे पर एक नोट तैयार करेगा. गृह मंत्रालय इस कानून के संबंध में अवधारणा पत्र देगा और उसके बाद हम सभी कानून मंत्रालय से कानून का मसौदा तैयार करने को कहेंगे. अधिकारी ने यह जानकारी दी. जारी भाषा

मंत्रालय पीडितों के पुनर्वास के लिए एक प्रोटोकाल या मानक प्रक्रिया स्थापित करने पर भी काम कर रहा है. अधिकारी ने बताया, ‘ पुनर्वास के मुद्दे को संवेदनशीलता के साथ लिए जाने की जरुरत है लेकिन कई राज्यों में अनुसरण के लिए कोई प्रक्रिया नहीं है. पीडितों के पुनर्वास के लिए मानक संचालन प्रक्रिया अधिसूचित करने का फैसला किया गया है.’

राष्ट्रीय विधि सेवा प्राधिकरण ने बच्चों की कारोबारी और यौन शोषण के मकसद से की जाने वाली तस्करी को रोकने, उनको बचाने तथा पीडितों के पुनर्वास में विभिन्न पक्षों की भूमिका सुझायी है.

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