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मुख्यमंत्री राहत कोष मामला: डांस ग्रुप ने लौटाया धन

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मुख्यमंत्री राहत कोष मामला: डांस ग्रुप ने लौटाया धन

मुंबई : मुख्यमंत्री राहत कोष के धन का इस्तेमाल महाराष्ट्र सरकार के कर्मचारियों के डांस ग्रुप को थाइलैंड यात्रा पर भेजने के लिए किये जाने के मुद्दे पर विवाद पैदा होने के बाद इस डांस ग्रुप ने आठ लाख रुपये कोष में लौटा दिये हैं. राहत कोष से धन सचिवालय जिमखाना को दिया गया था, जिसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री करते हैं. यह धन 15 नर्तकों की यात्रा को प्रायोजित करने के लिए दिया गया था. हर कलाकार के लिए 50 हजार रुपये की मंजूरी दी गयी थी. शेष 50 हजार रुपये की राशि विभिन्न अन्य खर्चों के लिए थी. राज्य में भारी सूखे को देखते हुए विपक्ष ने सरकार के इस कदम की आलोचना की थी. इसके बाद पूरी रकम का चेक राहत कोष में लौटा दिया गया है.

डांस ग्रुप के सदस्यों ने नृत्य प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए अपने धन से यात्रा करने का फैसला किया है. इस समूह के एक सदस्य अर्जुन राणे ने कहा, ‘हां, हमने धन लौटा दिया है. हम प्रतियोगिता के लिए अब अपने खर्च पर जाएंगे.’ समूह के अन्य सदस्यों ने कहा कि उन्हें ‘दुख’ पहुंचा और उन्हें लगा कि धन लौटा देना ‘सही’ है. इस समूह के नर्तक सचिवालय में सरकारी कर्मचारी हैं. उन्होंने निजी तौर पर आयोजित समारोह ‘फिफ्थ कल्चरल ओलंपियाड ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स 2015′ में प्रवेश किया है.

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली द्वारा सूचना के अधिकार कानून के तहत दायर किये गये सवाल के जवाब में कहा गया था कि कोष में से आठ लाख रुपये मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाले सचिवालय जिमखाना को हस्तांरित किए गए हैं. यह धन नर्तकों की 26 दिसंबर से 30 दिसंबर तक चलने वाली यात्रा के लिए था. चैरिटी कमिश्नर के पास वर्ष 1967 में पंजीकृत मुख्यमंत्री राहत कोष का इस्तेमाल प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों की मदद के लिए किया जाता है. लेकिन नृत्य प्रतियोगिता के लिए आर्थिक मदद की मंजूरी एक विशेष मामले के रूप में दी गयी.

यह मंजूरी ऐसे समय दी गयी जब राज्य के किसान सूखे से जूझ रहे हैं. कुल 660 किसान इस साल राज्य में आत्महत्या कर चुके हैं. विपक्ष समेत कई ओर से आलोचनाओं से घिर जाने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा था कि धन का हस्तांतरण बिल्कुल स्पष्ट था. विपक्ष ने कोष के दुरुपयोग पर सवाल उठाये थे. मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा था, ‘हम यह दोहराना चाहते हैं कि राज्य के सरकारी कर्मचारियों में वितरित किया गया धन राहत कोष से था, न कि सूखा कोष या जलयुक्त शिवार कोष से. वर्ष 2001 में जारी सरकारी प्रस्ताव के अनुसार, प्राकृतिक आपदाओं के समय से इतर, कोष का इस्तेमाल सात अन्य उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है.’

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