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छोटा राजन की गिरफ्तारी : क्या निगाहें राजन पर निशाना दाऊद पर है ?

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छोटा राजन की गिरफ्तारी : क्या निगाहें राजन पर निशाना दाऊद पर है ?

आशुतोष के पांडेय

सफेद टी शर्ट, कमर पर हाथ, मुस्कुराता हुआ चेहरा. उस चेहरे के ठीक पीछे खड़ा एक वर्दीधारी जवान. यह तस्वीर मीडिया में खूब तैर रही है. सोशल मीडिया पर शेयर भी की जा रही है. एक कमरा और कमरे में दो लोग खड़े हैं. एक इंडोनेशियाई इंटरपोल का जवान और दूसरा व्यक्ति है छोटा राजन. छोटा राजन को इंटरपोल ने गिरफ्तार कर लिया है. लेकिन इस मुस्कुराती तस्वीर के पीछे कुछ राज हैं छोटा राजन का. दाऊद का दुश्मन नंबर वन गिरफ्तारी के बाद इतना चीयरफुल मूड में हो. संदेह पैदा करता है. सवाल यह उठता है कि इस मुस्कान के मायने क्या हैं.

1993 में दाऊद से हुआ अलग

लगभग दो दर्जन से ज्यादा हत्याओं का आरोपी. जिसने 80 ओर नब्बे के दशक के बीच में भारत को अलविदा कह दिया. वह आज भी मीडिया के साथ भारत में चर्चा का विषय है. 1993 में मुंबई बम ब्लास्ट के बाद छोटा राजन ने दाऊद के गैंग को अलविदा कहकर अपना एक अलग गैंग बना लिया था . छोटा राजन पर लूट, हत्या और अपहरण के दर्जनों मामले दर्ज हैं. साल 2000 में दाऊद के खासमखास छोटा शकील की अगुआई में बैंकॉक के एक होटल में डिलिवरी मैन बनकर फायरिंग भी हुई थी. इस फायरिंग में छोटा राजन किसी तरह बच पाया था. गिरफ्तारी के बाद छोटा शकील के बयान भी मीडिया में आ रहे हैं कि वो हमारी वजह से गिरफ्तार हुआ है हम उसे मारकर ही दम लेंगे. दाऊद से छोटा राजन को जान का खतरा आज भी बना हुआ है. छोटा राजन भी कई बार चैनलों को फोन पर इंटरव्यू देता रहा है. छोटा राजन को भारत लाने में भी सरकार को कोई दिक्कत नहीं होगी क्योंकि इंडोनेशिया के साथ भारत की 2011 प्रत्यर्पण संधि भी है.

पूरा नाम राजेंद्र सदाशिव निखलजे

राजेंद्र सदाशिव निखलजे उर्फ छोटा राजन का भारत आना कई मायनों में सरकार के लिए लाभप्रद होगा. छोटा राजन से दाऊद के बारे में वह जानकारियां भी मिलेंगी जो जांच एजेंसियों के पास नहीं हैं. छोटा राजन दाऊद के स्ट्रेटजी और उसकी भारत को लेकर रणनीति का खुलासा भी कर सकता है. विश्वस्त सूत्रों की माने तो छोटा राजन की गिरफ्तारी के पीछे छोटा राजन और भारत सरकार के हीत दोनों सधने वाले हैं. जानकारी के मुताबिक इंटरपोल से वारंटी छोटा राजन अपने आपको असुरक्षित महसूस कर रहा है. साथ ही हाल के दिनों में स्वास्थ्य कारणों से छोटा राजन को इलाज के लिए हमेशा डॉक्टरों के संपर्क में रहना पड़ा है. विश्वस्त सूत्रों की माने तो छोटा राजन ने एक तरह से अपने आपको जानबूझकर इंटरपोल के हवाले किया है ताकि सुरक्षित रहने के साथ-साथ अपना इलाज बेहतर तरीके से करा सके.

गिरफ्तारी के मायने

भारतीय पुलिस सेवा के सेवानिवृत एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी छोटा राजन के मुस्कान के पीछे के रहस्यों को कुछ यू बयां करते हैं. उनके मुताबिक उसका टारगेट है पहले अपने आपको सुरक्षित करना. दूसरा दाऊद पर दवाब बनाने के लिए छोटा राजन की जरूरत भारत को अरसे से थी. नाम न छापने की शर्त पर पुलिस अधिकारी का कहना था कि इसे भारत सरकार और छोटा राजन की स्ट्रेटजी के रुप में भी देखा जा सकता है. यह भी संभावना है कि छोटा राजन ने अपनी सुरक्षा और इलाज की शर्तों पर भी गिरफ्तारी देने को तैयार हुआ हो. चाहे जैसे भी हो छोटा राजन की गिरफ्तारी भारत के लिए काफी फायदेमंद सिद्ध होने जा रही है.

मुस्कान का राज

हालांकि सरकार जिस तरह से इस गिरफ्तारी को पेश कर रही है उसकी छाप छोटा राजन की मुस्कुराहट मिटा दे रही है. क्योंकि इस गिरफ्तारी में कहीं भी संघर्ष और जद्दोजहद की निशानी नहीं दिख रही है. कहा जाता है कि छोटा राजन का क्रेज आज भी देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में कायम है. क्योंकि गाहे बगाहे वह इस बात को इंडियन मीडिया के माध्यम से स्वीकार करता रहा है. मुंबई में हुए चर्चित पत्रकार जेडे की हत्या के मामले में शामिल होने की बात उसने स्वयं स्वीकार की थी. लगभग 28 सालों से खुफिया एजेंसियों और पुलिस की गिरफ्त से दूर छोटा राजन का यूं मुस्कुराते हुए पकड़े जाना भले रहस्यमय लग रहा हो. लेकिन इतना तो तय है कि भारतीय खुफिया एजेंसियों के लिए भविष्य की रणनीति में छोटा राजन सहायक सिद्ध होगा.

गिरफ्तारी या रणनीति

छोटा राजन से भारत सरकार दाऊद पर कितना दवाब बना पाएगी यह आने वाले दिनों में पता चलेगा, लेकिन गिरफ्तारी के बाद भारत सरकार के गृह मंत्री का उसके विषय में जानकारी देना छोटा राजन की गिरफ्तारी के अहमियत को दर्शाता है. भारत सरकार छोटा राजन को उस कंधे की तरह इस्तेमाल करेगी जिसपर बंदूक रखकर गोली दाऊद पर चलायी जाएगी या फिर रणनीति यह भी हो सकती है कि छोटा राजन पर निगाहें और दाऊद पर निशाना.

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