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जानें ”कराची” से ”रांची” कैसे पहुंचा पाक का रमजान

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जानें ”कराची” से ”रांची” कैसे पहुंचा पाक का रमजान

नयी दिल्ली : पाकिस्तान की ओर से गीता को भारत भेजने के बदले रिटर्न गिफ्ट मिलने वाला है. प्राप्त जानकारी के अनुसार 15 साल बाद गीता की स्वदेश वापसी के बाद भारत भी कराची के रमजान को वापस उसके देश भेजकर शांति का संदेश देगा. एक टीवी चैनल से बात करते हुए रमजान ने कहा कि मैं पाकिस्तान जाना चाहता हूं. गीता के भारत आने के बाद मेरे पाकिस्तान जाने की उम्मीद बढ़ गयी है. परिवार के प्रताड़ना के बाद मैं पाकिस्तान से बांग्लादेश के रास्ते भारत पहुंचा और कुछ दिन रांची में रहने के बाद दिल्ली गया.

पाकिस्तान स्थित कराची के मुसा कॉलोनी निवासी मो रमजान रांची समेत मुंबई और दिल्ली में कई दिनों तक घूमता रहा. उसकी उम्र अभी 15 साल है. करीब तीन साल पहले वह बांग्लादेश से नाव से भारत आया था, उसके बाद रांची पहुंचा. रांची से मुंबई और फिर दिल्ली पहुंचा. अक्तूबर 2013 में वह ट्रेन से दिल्ली से कोलकाता जा रहा था. भोपाल की जीआरपी ने उसे ट्रेन में पकड़ा. इसके बाद 22 अक्तूबर 2013 को उसे भोपाल स्थित चाइल्डलाइन में भेज दिया. वहां उसने पहले तो यह बताया कि वह रांची का रहनेवाला है, लेकिन रांची में रहने का कोई प्रमाण नहीं दे सका.

कुछ दिनों बाद उसने वहां रह रहे दूसरे बच्चों का बताया कि वह पाकिस्तान के कराची का रहनेवाला है, जिसके बाद भोपाल चाइल्ड लाइन की डायरेक्टर अर्चना सहाय ने वहां के चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को सूचना दी. चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के अधिकारियों ने मामले की जानकारी बांग्लादेशी एंबेसी को दी. मो रमजान ने भोपाल में मीडियाकर्मियों को बताया कि पांच साल पहले उसके पिता कराची से बांग्लादेश चले गये थे.

वहां पिता उसे प्रताड़ित करता था. प्रताड़ना से तंग आकर वह घर से भाग कर बांग्लादेश के कोमिला इलाके में चला गया. वहां कुछ लोगों ने उसे बताया कि वह भारत के रास्ते पाकिस्तान जा सकता है. इसके बाद वह नाव से भारत आ गया. उसके बाद रांची पहुंचा. कुछ दिन यहां रहा, फिर रांची से मुंबई और दिल्ली चला गया. वहां से वह ट्रेन से कोलकाता जा रहा था, रास्ते में पुलिस ने पकड़ लिया.

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