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केजरीवाल और एलजी नजीब के बीच फिर छिड़ी जंग

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केजरीवाल और एलजी नजीब के बीच फिर छिड़ी जंग

नयी दिल्ली : एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए दिल्ली कैबिनेट ने आज प्रस्ताव पारित कर मूल्य-वर्धित कर (वैट) आयुक्त को अधिकारमुक्त करने के उप-राज्यपाल नजीब जंग के अधिकार को चुनौती दी. दिल्ली सरकार का कहना है कि वैट आयुक्त को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वह ‘भ्रष्टाचार’ से लड रहे थे. कैबिनेट ने ‘राजनीतिक अत्याचार’ से नौकरशाहों को बचाने के लिए एक मंत्री-समूह भी गठित किया. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में पारित किये गये पहले प्रस्ताव में जंग से उन ‘बाध्यकारी परिस्थितियों’ को स्पष्ट करने के लिए कहा गया जिसके कारण वैट आयुक्त को पद से विमुक्त किया गया.

कैबिनेट ने वैट आयुक्त के पद से विजय कुमार का ‘अचानक, बिना बताए’ तबादला करने पर गहरी चिंता जतायी और आरोप लगाया कि एक अंतरराष्ट्रीय फूड चेन और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली एक ऑटोमोबाइल डीलर के खिलाफ कार्रवाई करने पर उनका तबादला कर दिया गया. कैबिनेट प्रस्ताव में दावा किया गया कि कई वरिष्ठ अधिकारियों ने सरकार को बताया कि उप-राज्यपाल ने उन्हें बुलाया और कहा कि यदि उन्होंने प्रशासन के कामकाज में बाधा पैदा करने की कवायद में हिस्सा नहीं लिया तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे और पुलिस कार्रवाई की भी धमकी दी गयी.

सरकार ने एक आधिकारिक बयान में कहा, ‘इन अधिकारियों से कहा गया था कि वे सरकार के फैसलों में बाधा पैदा करने वाली एवं प्रतिकूल फाइल नोटिंग देकर आम आदमी पार्टी की निर्वाचित सरकार को पंगु बनाएं.’ इन आरोपों को खारिज करते हुए उप-राज्यपाल सचिवालय ने कहा कि जंग ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेशों के आधार पर कार्रवाई की. सचिवालय के मुताबिक नौ अक्तूबर को गृह मंत्रालय ने निर्देश जारी कर कहा था कि दिल्ली से अन्य केंद्रशासित प्रदेशों में जिन पांच अधिकारियों का तबादला पहले कर दिया गया था, उन्हें तत्काल प्रभाव से विमुक्त कर दिया जाए. कुमार का नाम इन पांच अधिकारियों की सूची में था.

उप-राज्यपाल द्वारा अधिकारियों को धमकाने के आरोपों पर जंग के कार्यालय ने कहा कि वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहेगा कि दिल्ली की चुनी हुई सरकार ने मुख्य सचिव, गृह सचिव, ऊर्जा सचिव और विधि सचिव सहित अन्य अधिकारियों के साथ कैसा सलूक किया है. कैबिनेट ने उप-राज्यपाल से चार सवाल पूछे हैं कि क्या यह सच है कि उन्होंने विमुक्ति आदेश पारित करने के बाद कुमार को बुलाया और उन्हें तत्काल दिल्ली से चले जाने की धमकी दी. यह भी पूछा गया कि क्या कुमार को विमुक्त करने को लेकर उन्हें पीएमओ या गृह मंत्रालय से कोई लिखित या मौखिक निर्देश प्राप्त हुए थे.

दूसरे प्रस्ताव में कैबिनेट ने एक जीओएम गठित करने का फैसला किया जो अधिकारियों को राजनीतिक अत्याचार से बचाएगा. जीओएम ऐसे सभी मुद्दों से निपटने के लिए कदम उठाने का हकदार होगा. कैबिनेट ने निर्वाचित सरकार से विचार-विमर्श किए बगैर कुमार को विमुक्त करने को लेकर जंग को आडे हाथ लिया.

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